सुरेंद्र कुमार/शंकर पोद्दार
Ansh Anshika Case: रांची से लापता हुए भाई-बहन अंश और अंशिका की तलाश एक समय देशव्यापी अभियान बन चुकी थी. झारखंड समेत करीब 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस, विशेष जांच टीमें और कई सामाजिक संगठन 12 दिनों तक मासूमों का सुराग पाने में लगे रहे. साथ ही लगभग 17 हजार थानों को अलर्ट किया गया था, लेकिन इस जटिल और संवेदनशील मामले में निर्णायक मोड़ चितरपुर के बजरंग दल से जुड़े स्थानीय युवाओं की सजगता से आया. जानकारी के अनुसार, बिहार का एक दंपत्ति पिछले कुछ दिनों से चितरपुर बाजार टांड़ और आस-पास के इलाकों में किराये का मकान खोज रहा था. वे जहां-जहां जा रहे थे, यह कहते नहीं थक रहे थे कि उनके साथ दो छोटे बच्चे हैं.
स्थानीय लोगों को हुआ दंपत्ति पर शक
बच्चों के अपहरण की खबरों से पहले से सचेत कुछ स्थानीय युवाओं को यह बात अस्वाभाविक लगी. उन्होंने मामले को हल्के में लेने के बजाय दंपत्ति पर नजर रखना शुरू कर दिया. मंगलवार की रात भर बजरंग दल से जुड़े डब्लू साहू, सुनील कुमार, सचिन प्रजापति, सन्नी कुमार और अंशु कुमार इलाके में सक्रिय रहे. बुधवार सुबह करीब 7:30 बजे जब वे खौरागढ़ा (अहमद नगर) स्थित रोशन आरा के मकान पहुंचे और वहां दोनों बच्चों को देखा, तो उनका संदेह पूरी तरह पुख्ता हो गया. बिना समय गंवाये युवाओं ने वीडियो कॉल के जरिये बच्चों के परिजनों से संपर्क किया और पहचान की पुष्टि करायी. Ansh Anshika Case 22 states Police searched for 12 days but these young people cracked conspiracy
नागरिक जिम्मेदारी से संभव हुई तलाश
सूचना मिलते ही रजरप्पा पुलिस हरकत में आयी और मौके पर पहुंचकर दोनों मासूमों को सकुशल बरामद किया. इस घटना ने यह साफ कर दिया कि तकनीक, सतर्कता और नागरिक जिम्मेदारी जब साथ आती है, तो सबसे सधी हुई साजिश भी बेनकाब हो जाती है. बच्चों के सकुशल बरामद होने से जहां पुलिस प्रशासन ने राहत की सांस ली है. वहीं इन युवाओं की बहादुरी की तारीफ पूरे देश भर में हो रही है. पूर्व मुख्यमंत्री बाबुलाल मरांडी ने भी इस स्थानीय युवाओं की जमकर तारीफ की और झारखंड पुलिस पर निशाना साधते हुए कहा कि पुलिस केवल अपना पीठ थपथपा रही है. लगता है अधिकारियों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भी गलत सूचना दी है.
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