रांची : आचार्य विराग सागर जी महाराज के शिष्य श्रमणाचार्य श्री108 विमर्श सागर जी महामुनिराज का ससंघ (27 पिच्छी के साथ) मंगलवार को मंगल प्रवेश हुआ.गाजे-बाजे व पुष्प वर्षा कर भक्तों ने उनसे आशीर्वाद लिया.
इसके बाद भगवान के जयकारे अौर उनके संदेश का प्रचार करते हुए उन्हें रातू रोड स्थित वासुपूज्य जिनालय लाया गया. यहां उन्होंने पूजा अर्चना कर भक्तों को आशीर्वाद दिया. इसके बाद वे हरमू रोड, कार्ट सराय रोड,अपर बाजार होते हुए दिगंबर जैन मंदिर पहुंचे. यहां भक्तों ने उनका पादप्रक्षालन कर स्वागत किया. इस दौरान पूरा मंदिर परिसर उनके जयकारे से गूंज रहा था. मौके पर मुनि श्री ने भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन जीने के लिए है.संतों का सानिध्य मिलना दुर्लभ होता है. वैसे सच कहा जाये तो यदि संत आपके ह्रदय में हो तो सानिध्य मिलना सुलभ है. इससे पूर्व प्रातः 6:30 मुनि श्री लालगुटवा से विहार करते हुए नौ बजे पिस्कामोड़ पहुंचे.
रांची के सांसद संजय सेठ ने जैन समाज के कई श्रद्धालुओं के साथ यहां उनकी अगवानी की. समाज के अध्यक्ष उमेद मल काला, मंत्री कमल विनाक्यिा सहित कार्यकारिणी के सदस्यों व पूर्व अध्यक्षों ने आचार्यश्री को श्रीफल अर्पित कर आशीर्वाद लिया. शाम छह बजे से गुरु भक्ति व महाआरती हुई. आचार्य श्री संभवत दो से तीन दिनों तक यहां रुकेंगे. उसके बाद पारसनाथ के लिए विहार कर जायेंगे.
