रामगढ़: रामगढ़ पुलिस ने अनुसंधान प्रक्रिया को पारदर्शी, समयबद्ध और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक बड़ी डिजिटल पहल की है. पुलिस अधीक्षक मुकेश कुमार लुणायत ने प्रेस कांफ्रेंस कर जानकारी दी. बताया कि पीआरआइएसएम नामक डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया गया. जिसमें एफआइआर से लेकर फाइनल रिपोर्ट - अंडर वन पीआरआइएसएम थीम पर आधारित इस प्लेटफॉर्म के जरिए अब किसी भी आपराधिक कांड में प्राथमिकी दर्ज होने से लेकर अंतिम प्रतिवेदन या आरोप-पत्र दाखिल होने तक हर चरण की डिजिटल मॉनिटरिंग की जाएगी.
इस प्लेटफॉर्म में केस से जुड़े सभी महत्वपूर्ण पहलुओं जैसे एफआइआर, अनुसंधानकर्ता का नाम, कांड का प्रकार, साक्ष्य संकलन, अभियुक्त की स्थिति (गिरफ्तार या फरार), प्रगति रिपोर्ट, तकनीकी साक्ष्य और 60 और 90 दिनों की वैधानिक समय-सीमा पर विशेष नजर रखी जाएगी.
पीआरआइएसएम के माध्यम से पुलिस अधीक्षक, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, पुलिस निरीक्षक व थाना प्रभारी किसी भी कांड की प्रगति की नियमित समीक्षा कर सकेंगे. साथ ही लंबित मामलों में अनुसंधानकर्ताओं को समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए जा सकेंगे, जिससे अनावश्यक देरी पर रोक लगेगी.
60 और 90 दिन के मामलों पर विशेष फोकस
इस पहल के तहत 60 और 90 दिनों की समय-सीमा वाले मामलों के त्वरित निष्पादन और एनसीएलआइ पोर्टल पर जिले के प्रदर्शन को बेहतर बनाने पर खास ध्यान दिया जाएगा. पोर्टल में डिजिटल रिमाइंडर व मॉनिटरिंग सिस्टम भी जोड़ा गया है, जिससे समय-सीमा के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित हो सके. एसपी मुकेश कुमार लुणायत ने कहा कि पीआरआइएसएम एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो हर केस की प्रगति को ट्रैक करने में मदद करेगा व यह सुनिश्चित करेगा कि कोई भी मामला अनावश्यक रूप से लंबित न रहे.
इससे पुलिसिंग को और अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और परिणामोन्मुख बनाया जा सकेगा. रामगढ़ पुलिस का कहना है कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से नागरिक-केंद्रित और प्रभावी पुलिसिंग को मजबूत करने की दिशा में पीआरआइएसएम एक अहम कदम साबित होगा. मौके पर एसडीपीओ रामगढ़ आलोक रंजन, डीएसपी मुख्यालय अकरम रजा, एसडीपीओ पतरातू राघवेंद्र शर्मा मुख्य रूप से उपस्थित थे.
