रामगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाके में पढ़ाई की राह में रोड़ा बना नाला, जान जोखिम में डाल स्कूल जा रहे 200 बच्चे

रामगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में बच्चों को स्कूल जाने के लिए नाले को पार करना पड़ता है. पुल न होने के कारण हर दिन उनकी जान जोखिम में पड़ती है. शिक्षकों ने मिलकर एक अस्थायी पुल बनाया है, लेकिन स्थायी समाधान की मांग है.

कुजू से धनेश्वर और प्रदीप की रिपोर्ट

रामगढ़: रामगढ़ और बोकारो जिले की सीमा पर स्थित नक्सल प्रभावित क्षेत्र में स्कूली बच्चों के लिए शिक्षा की राह बेहद दुर्गम बनी हुई है. बोकारो जिले के गोमिया प्रखंड अंतर्गत सिमरबेड़ा टोला, गिधिनियां और टुंगरी जैसे ग्रामीण इलाकों से करीब 200 बच्चे रोजाना 3 से 4 किलोमीटर का मुश्किल सफर तय कर बड़की डूंडी स्थित सरस्वती विद्या मंदिर पढ़ने आते हैं. रास्ते में पड़ने वाले नाले पर पुल न होने से बारिश के दिनों में जलस्तर बढ़ते ही बच्चों के कपड़े, जूते और पठन-सामग्री भींग जाती है. लंबे समय से चली आ रही इस समस्या का कोई समाधान न निकलता देख विद्यालय के शिक्षकों ने खुद मजदूर लगाकर बांस और लकड़ी के सहारे एक अस्थायी पुलिया का निर्माण कराया है, ताकि बच्चों को नाला पार करने में सहूलियत हो सके.

500-600 विद्यार्थियों का भविष्य अधर में

विद्यालय में कुल 500 से 600 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जिनमें से लगभग 200 छात्र-छात्राएं बोकारो जिले के सुदूर गांवों से इसी रास्ते से होकर पहुंचते हैं. प्रधानाचार्य मनोज कुमार, शिक्षक जयनंदन महतो, विद्याधन सम्राट, चित्ररंजन टुडू और शिक्षिका अनु कुमारी का कहना है कि विषम परिस्थितियों के बावजूद क्षेत्र में पढ़ाई के प्रति जागरूकता बढ़ी है. खासकर दूर दराज से आने वाली छात्राओं को नाला पार करते समय सबसे ज्यादा फजीहत झेलनी पड़ती है. शिक्षकों का मानना है कि लकड़ी का पुल केवल तात्कालिक राहत है, स्थायी पक्का पुल बनने से बच्चों का आवागमन सुरक्षित होगा और स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या भी बढ़ेगी. बरतु महतो, जीवलाल महतो, राजू साव, परमेश्वर राम, गोविंद महतो, मोतीलाल महतो और पुष्पा कुमारी समेत अन्य शिक्षकों ने भी इस मांग का पुरजोर समर्थन किया है.

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मांडू BDO बोलीं: आवेदन मिलते ही शुरू होगी कार्रवाई

इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मांडू की प्रखंड विकास अधिकारी (BDO) रीना कुजूर ने बताया कि यह विषय पहले उनके संज्ञान में नहीं था. अब मामला सामने आने के बाद उन्होंने कहा कि स्थानीय ग्रामीण या स्कूल प्रशासन की ओर से एक लिखित आवेदन सौंपा जाए. आवेदन प्राप्त होते ही प्रशासनिक स्तर पर नाले पर पक्के पुल के निर्माण और सड़क की स्थिति सुधारने की दिशा में उचित पहल की जाएगी.

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लेखक के बारे में

By समीर उरांव

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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