जन संस्कृति मंच को रचना कर्म पर देना होगा जोर : मनोज

जन संस्कृति मंच को रचना कर्म पर देना होगा जोर : मनोज

कुजू. विभाजनकारी संस्कृति के खिलाफ सामूहिकता की संस्कृति को विकसित करने के लिए लोगों तक जाना होगा और संस्कृति के औजारों- रंगकर्म व गायन टीमों को लगातार विकसित करना होगा. उक्त बातें मुख्य अतिथि जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय महासचिव मनोज कुमार सिंह ने कही. वह रविवार को मुरपा स्थित अक्षत बैंक्वेट हॉल के सभागार में आयोजित झारखंड जन संस्कृति मंच के पांचवें राज्य सम्मेलन के दूसरे दिन संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि जन संस्कृति मंच को रचना कर्म पर जोर देना होगा. झारखंड में जल -जंगल -जमीन पर हो रहे हमले केवल यहां के संसाधनों पर नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति को भी छीनने की कोशिश है. हमलावरों के खिलाफ जो जन संघर्ष और जनांदोलन हैं, उनके साथ संगठन को जीवंत रिश्ता बनाना होगा. संगठन को स्त्रियों की रचनाशीलता पर और गहराई से ध्यान देना होगा. समाज में व्याप्त अंधविश्वास व धार्मिक विद्वेष के खिलाफ रचनात्मक प्रतिरोध की जरूरत पर भी जोर दिया गया. उन्होंने कहा कि सत्ता और बाजार मिलकर पूरे देश को एक रंग में रंगना चाहते हैं. मंच के पूर्व सचिव बलभद्र ने कामकाज की रिपोर्ट पेश की. सत्र की अध्यक्षता जावेद इस्लाम, आरपी वर्मा और मनोज कुमार सिंह ने की. मौके पर वरिष्ठ लेखक कौलेश्वर गोप को सम्मेलन की ओर से राष्ट्रीय महासचिव मनोज सिंह ने सम्मानित किया. 71 सदस्यीय राज्य परिषद् का निर्माण किया गया. राज्य परिषद् ने 27 सदस्यों का राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य के रूप में चुनाव किया. नयी कार्यकारिणी ने संस्कृतिकर्मी सुरेंद्र बेदिया का राज्य सचिव, कवि-संपादक शंभु बादल का राज्य अध्यक्ष और पत्रकार जावेद इस्लाम का कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में चुनाव किया. आरपी वर्मा, बीएन ओहदार, भरत बेदिया, रिजवान सिद्दिकी, शंकर पांडेय और एसएन पाठक को राज्य उपाध्यक्ष, रमेश शर्मा को उपसचिव और जयबीर हांसदा, डॉ कृष्णा गोप, जन्मेजय और महेश गोप को सह सचिव बनाया गया.

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Published by: Saroj tiwary

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