रैलीगढ़ा का विस्तार करने आैर सुरक्षा मानक के कारण दिया जा रहा है नोटिस : प्रबंधन
विरोध में धरना प्रदर्शन नौ मई को
गिद्दी (हजारीबाग) : रैलीगढ़ा मल्टीपरप्स इंस्टीट्यूट (एमपीआइ) के लगभग 40 गैर सीसीएल आैर सीसीएलकर्मियों को प्रबंधन ने 10 दिनों के अंदर मकान से हटने का नोटिस दिया है. प्रबंधन ने लोगों को चेतावनी दी है कि नहीं हटने पर कार्रवाई की जायेगी. इससे लोगों में आक्रोश है.
लोगों ने इसके विरोध में नौ मई को पीओ कार्यालय के समक्ष धरना प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है. लोगों का कहना है कि हमारी बातों पर प्रबंधन सकारात्मक रूप से विचार नहीं करेगा, तो आंदोलन किया जायेगा. मिली जानकारी के अनुसार, कोलियरी प्रबंधन ने एमपीआइ में वर्षों से रह रहे गैर सीसीएलकर्मियों आैर सीसीएलकर्मियों को नोटिस दिया है.
यहां के ज्यादातर गैर सीसीएल लोग लोकल सेल में कोयला लदाई, ठेका सहित अन्य छोटे-मोटे काम कर जीवकोपार्जन चलाते हैं. लोगों के पास अब विरोध के अलावा कोई रास्ता नहीं है. लोगों का कहना है कि 30 वर्ष पहले रैलीगढ़ा परियोजना के विस्तारीकरण के दौरान उन्हें रैलीगढ़ा साइडिंग से रैलीगढ़ा एमपीआइ में बसाया गया है. प्रबंधन ने यहां पर अवैध तरीके से बसने का जो नोटिस दिया है, उससे कई बातें सामने आ रही है. लोगों का कहना है कि घर उजाड़ने के पहले उन्हें बसाने का काम प्रबंधन को करना चाहिए.
अवैध रूप से बना है मकान
प्रबंधन का कहना है कि रैलीगढ़ा एमपीआइ में जो लोग बसे हुए हैं, वे कोलियरी के लीज क्षेत्र में आते हैं. यहां पर लोगों का मकान अवैध रूप से बना हुआ है. सुरक्षा मानक के अनुसार माइनिंग बाउंडरी से लगभग 300 मीटर तक कोई मकान नहीं होना चाहिए. कोलियरी का विस्तार हो रहा है. इस दृष्टिकोण से उन्हें हटाया जा रहा है. लोग नहीं हटेंगे, तो कोलियरी का अस्तित्व नहीं बचेगा.
एमपीआइ के लोगों ने नोटिस के विरोध में की बैठक
रैलीगढ़ा एमपीआइ के लोगों ने नोटिस मिलने के विरोध में रविवार को बैठक की. बैठक में लोगों ने कहा कि रैलीगढ़ा कोलियरी के विस्तारीकरण का कहीं से हमलोग बाधक नहीं बनना चाहते हैं. अपना वजूद बचाने के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन का रास्ता अपनायेंगे. पहले चरण में पीओ कार्यालय के समक्ष धरना -प्रदर्शन होगा. बैठक में मजदूर नेता सैनाथ गंझू, पुरुषोत्तम पांडेय, पुरुषोत्तम सिंह उर्फ बिल्ला, धनंजय सिंह, एमपीआइ के आशुतोष कुमार शर्मा, इरशाद अहमद, वार्ड सदस्य प्रकाश लोहार, गोपाल वरदा, विजय हांसदा, मनोज सोय, रानी जरिका, सिन्नी देवी, आशा, नंदनी, पूनम, सूरजमनी वारदा, सीमा, वर्षा, संध्या उपस्थित थे.
प्रबंधन एमपीआइ को पूर्ण रूप से खाली करायेगा
रैलीगढ़ा परियोजना में कोयले का उत्पादन फिलहाल गिद्दी सी परियोजना की दो नंबर पुरानी खदान में चल रहा है. यह खदान शीशा खदान से भी जानी जाती है. कोयले का भंडार समाप्त हो रहा है.
इस दृष्टिकोण से प्रबंधन कोलियरी का विस्तार करना चाह रहा है. आनेवाले दिनों में एमपीआइ को पूर्ण रूप से प्रबंधन खाली करा सकता है. एमपीआइ जोन में लगभग 12 लाख मीट्रिक टन कोयले का भंडार है. एमपीआइ के लोगों को प्रबंधन धीरे-धीरे हटायेगा. प्रबंधन का कहना है कि विस्तार से ही कोलियरी का अस्तित्व बचेगा.
50 के दशक में स्थापित हुआ था एमपीआइ
50 के दशक में रैलीगढ़ा एमपीआइ को स्थापित किया गया था. एमपीआइ यानी मल्टीपरप्स इंस्टीट्यूट को भारत सरकार के सहयोग से यहां पर शैक्षणिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्थापित किया गया था. अब इसका अस्तित्व खतरे में है. जाहिर है कोलियरी का विस्तार होगा, तो इसका अस्तित्व समाप्त हो जायेगा.
