हमें अपनी संस्कृति को भावी पीढ़ी के लिए सहेज कर रखने की जरूरत है. मुखिया पारो देवी ने कहा की डायर जतरा मेला लोगों में आपसी प्रेम व भाईचारगी को बढ़ाता है. मेले में आसपास के दर्जनों गांव से हजारों लोग जुटे थे. सांस्कृतिक कार्यक्रमों लोहरदगा के कयुम म्यूजिकल ग्रुप के कलाकारों ने अपने गीत-नृत्य से लोगों का मनोरंजन किया.
मौके पर महादेव बेसरा, सीताराम किस्कू, शनिचर मांझी, तालू मुर्मू, महेश गंझू, राकेश सिंह, विश्राम सोरेन, मनबोध गंझू आदि उपस्थित थे. आयोजन को सफल बनाने में मेला संरक्षक चरका करमाली, महादेव बेसरा, विश्वनाथ मांझी, सीताराम किस्कू, अध्यक्ष तुलसी उरांव, सचिव महेश गंझू, कजरू, खीरू, विस्थापित संघर्ष मोरचा के विश्राम सोरेन, लालदेव गंझू, तिलेश्वर गंझू, जतरू भगत, मनेष उरांव, संजय मुर्मू, कमलेश गंझू, जुगल सोरेन, उदम सोरेन, सरोज मुर्मू, भुवनेश्वर सोरेन, रामवृक्ष सोरेन, महेश करमाली, सोमरा उरांव, बासुदेव गंझू, पाहन छत्रु मुंडा, वार्ड सदस्य सोहामुनी देवी का योगदान रहा.
