रामनरेश तिवारी की रिपोर्ट
पाटन (पलामू). पलामू जिले के पाटन प्रखंड के विभिन्न जंगलों में इन दिनों अवैध रूप से कीमती लकड़ियों की कटाई का मामला सामने आया है. ग्रामीणों का आरोप है कि लकड़ी तस्करों द्वारा जंगलों से खैर, शीशम समेत अन्य कीमती पेड़ों की लगातार कटाई की जा रही है. ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते अवैध कटाई पर रोक नहीं लगी तो जंगलों पर इसका असर पड़ सकता है.
जलावन के बहाने कीमती लकड़ी काटने का आरोप
ग्रामीणों के अनुसार, लकड़ी तस्कर जलावन की लकड़ी लाने के बहाने जंगल में प्रवेश करते हैं और वहां से खैर, शीशम समेत अन्य कीमती पेड़ों को काटकर बाहर निकालते हैं. आरोप है कि इन लकड़ियों का इस्तेमाल चौकी, दीवान, टेबल, कुर्सी और अन्य फर्नीचर बनाने में किया जाता है. ग्रामीणों ने यह भी बताया कि कुछ लोगों ने अपने घरों में छोटी मशीनें लगा रखी हैं, जहां लकड़ी की कटाई और फर्नीचर तैयार करने का काम किया जाता है. इसके बाद तैयार सामान को खुले तौर पर बेचने का भी दावा किया गया है.
गश्ती नहीं होने से अवैध कटाई
ग्रामीणों का कहना है कि अवैध कटाई की जानकारी कई बार वन विभाग के अधिकारियों को दी गई है. इसके बावजूद जंगलों में नियमित गश्ती नहीं होने से अवैध कटाई करने वालों को मौका मिल रहा है. कुछ ग्रामीणों ने वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए तस्करों से मिलीभगत और संरक्षण के आरोप भी लगाए हैं. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
दीपौवा जंगल में उपकरण छोड़कर भागे लोग
ग्रामीणों के अनुसार, शनिवार की मध्य रात्रि दीपौवा जंगल में कुछ लोगों के लकड़ी काटने की सूचना मिली. इसके बाद ग्रामीणों की एक टोली जंगल की ओर गई. ग्रामीणों के पहुंचने की भनक लगते ही वहां मौजूद लोग भाग निकले. इस दौरान लकड़ी काटने में इस्तेमाल होने वाले कुछ उपकरण जंगल में ही छूट गए. ग्रामीणों ने उपकरण अपने कब्जे में लेने और इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को देने की बात कही है.
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ग्रामीणों ने बनाई निगरानी टोली
ग्रामीणों का कहना है कि जंगलों की सुरक्षा के लिए अब वे खुद टोली बनाकर निगरानी कर रहे हैं. उनका दावा है कि अवैध कटाई में शामिल लोगों की पहचान कर उन्हें पकड़ने का प्रयास किया जा रहा है. ग्रामीणों ने वन विभाग से जंगलों में नियमित गश्ती बढ़ाने, अवैध पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने और लकड़ी तस्करी में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है.
