पलामू में शुरू होगी टाइगर सफारी, 250 करोड़ होगा खर्च, युवाओं को मिलेगा रोजगार

Palamu Tiger Safari: झारखंड का पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) रोमांचक टाइगर सफारी, घने जंगल और अद्भुत वन्यजीवन के साथ पर्यटकों के लिए अनूठा अनुभव है. यहां जंगल सफारी, बर्ड वॉचिंग, ट्रैकिंग जैसी गतिविधियां उपलब्ध हैं. टाइगर सफारी शुरू होने से झारखंड के प्रमुख पर्यटन स्थल का रोमांच और बढ़ जायेगा.

Palamu Tiger Safari: झारखंड का एकमात्र टाइगर रिजर्व पलामू में है. पलामू टाइगर रिजर्व, जिसे संक्षेप में पीटीआर भी कहते हैं, झारखंड के साथ-साथ देश भर के लोगों का पसंदीदा पर्यटन स्थल है. इसकी वजह इस जंगल में मिलने वाले बाघ, तेंदुआ, हाथी, हिरण समेत कई अन्य वन्यजीव की प्रजातियां हैं, जिसे देखने लोग यहां आते हैं. पलामू टाइगर रिजर्व को और आकर्षक बनाने के लिए यहां टाइगर सफारी की शुरुआत की जायेगी. सरकार ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है.

मुख्य 9 टाइगर रिजर्व में एक है पलामू टाइगर रिजर्व

पलामू टाइगर रिजर्व की बात करें, तो यह देश के 9 ओरिजिनल टाइगर रिजर्व में एक है. झारखंड का एकमात्र टाइगर रिजर्व पीटीआर है. वर्तमान में इस टाइगर रिजर्व में 5 बाघ हैं. अगर टाइगर सफारी की शुरुआत हो जाती है, तो यह इसके आकर्षण में एक और पहलू जुड़ जायेगा.

Palamu Tiger Safari: डालटनगंज के पास है पलामू टाइगर रिजर्व

पलामू टाइगर रिजर्व (Palamau Tiger Reserve) है, पलामू जिले के डालटनगंज (मेदिनीनगर) के पास है. पलामू टाइगर रिजर्व में सफारी का अनुभव आपको घने जंगल, घाटियां, जल स्रोत और विविध वनस्पति के बीच रोमांच प्रदान करता है. बिहार-झारखंड में बाघों की संख्या तुलनात्मक रूप से कम है, इसलिए बाघ दिखना पूरी तरह किस्मत पर निर्भर करता है. कुछ पर्यटक बाघ देखने की चाहत में कई दिनों तक रुक जाते हैं.

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सफारी के दौरान पर्यटकों को क्या बताते हैं गाइड

सफारी के दौरान गाइड पर्यटकों को बाघों के पगमार्क (पैरों के निशान), उनकी गतिविधियों की जानकारी, साथ ही अन्य पशु-पक्षी भी दिखाते हैं. यहां हाथी सफारी और जीप सफारी दोनों विकल्प पर्यटकों को मिलेंगे. पर्यटन के साथ-साथ यह इलाका जैव-विविधता, पारंपरिक गांव, जीवन और स्थानीय आदिवासी संस्कृति से भी रू-ब-रू होने का मौका देता है.

पीटीआर में होंगी ये सुविधाएं

  • सफारी राइड (जीप और हाथी द्वारा)
  • जंगल ट्रैकिंग और नेचर वॉक
  • बर्ड वॉचिंग (कई दुर्लभ पक्षियों की प्रजातियां)
  • जंगल में सरकारी गेस्ट हाउस और लॉज की सुविधा

कब जायें पीटीआर और कैसे करवायें बुकिंग

  • सफारी के लिए प्रवेश शुल्क और बुकिंग ऑनलाइन या रिजर्व एरिया के गेट पर की जाती है.
  • घूमने का सबसे अच्छा समय नवंबर से अप्रैल के बीच है.
  • मानसून के दौरान (जून से सितंबर तक) पार्क बंद रहता है.

पर्यटकों का पसंदीदा स्थल है पलामू टाइगर रिजर्व

झारखंड में अगर आप असली जंगल का रोमांच, टाइगर सफारी, और वन्यजीवों को करीब से देखना चाहते हैं, तो पलामू टाइगर रिजर्व सबसे बढ़िया जगह है. हां, वहां जाने से पहले सफारी शेड्यूल, बुकिंग और नियमों की जानकारी यात्रा से पहले जरूर ले लें.

सफारी के लिए 150 हेक्टेयर जमीन की जरूरत

पलामू टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर प्रजेश जेना बताते हैं कि सफारी के लिए 150 हेक्टेयर जमीन की जरूरत होगी. राजगीर सफारी देश के पहले सफल मॉडल्स में एक है. वहां कांच के पुल जैसे कई आकर्षण हैं. उन्होंने कहा कि यह टाइगर सफारी केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि पर्यटन के जरिये क्षेत्र की आर्थिक समृद्धि बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन का जरिया बनेगी.

टाइगर सफारी की लागत करीब 250 करोड़ रुपए

झारखंड में टाइगर सफारी परियोजना की लागत करीब 250 करोड़ रुपए आ सकती है. पलामू बाघ अभ्यारण्य 1,129 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है. इसमें से 414.08 वर्ग किलोमीटर कोर एरिया और 715.85 वर्ग किलोमीटर बफर जोन है. बफर जोन में 53 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर्यटकों के लिए खुला है.

पीटीआर में कहां बनेगी टाइगर सफारी

पीटीआर के डिप्टी डायरेक्टर का कहा है कि टाइगर सफारी के लिए भूमि की पहचान कर ली गयी है. यह टाइगर रिजर्व के पुटूगढ़ क्षेत्र में है. परियोजना की स्थापना सभी मानकों का पालन करते हुए की जायेगी. उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र वर्षों से नक्सल प्रभावित और पिछड़ा रहा है. यहां अब तक रोजगार के अवसर भी नगण्य रहे हैं. टाइगर सफारी शुरू होने से इस क्षेत्र का समुचित विकास होने की उम्मीद है.

भारत में हैं 50 से अधिक ‘टाइगर रिजर्व’

भारत में 50 से अधिक ‘टाइगर रिजर्व’ हैं, जहां बाघों का संरक्षण और पर्यटन की सुविधा है. कान्हा टाइगर रिजर्व (मध्यप्रदेश), पेरियार टाइगर रिजर्व (केरल), सरिस्का टाइगर रिजर्व (राजस्थान), पलामू टाइगर रिजर्व (झारखंड) प्रमुख टाइगर रिजर्व हैं. ये टाइगर रिजर्व ही भारत में मुख्य रूप से ‘टाइगर सफारी’ का अनुभव कराते हैं.

भारत के प्रमुख टाइगर रिजर्व और टाइगर सफारी पार्क

राज्य/क्षेत्रप्रमुख टाइगर रिजर्व
मध्यप्रदेशकान्हा टाइगर रिजर्व, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, पन्ना टाइगर रिजर्व
पश्चिम बंगालसुंदरवन टाइगर रिजर्व (दुनिया का सबसे बड़ा मैंग्रोव टाइगर रिजर्व)
उत्तराखंडकिरणी, नैनीताल, जिम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व
तमिलनाडुकलाकाड़-मुन्डनथुरै टाइगर रिजर्व
केरलपेरियार टाइगर रिजर्व
झारखंडपलामू टाइगर रिजर्व
अरुणाचल प्रदेशकामलांग टाइगर रिजर्व
असमकामरूप, कामेंग टाइगर रिजर्व
राजस्थानसरिस्का टाइगर रिजर्व, रणथंभौर टाइगर रिजर्व
महाराष्ट्रताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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