बिहार के पशुचारे पर निर्भर हुसैनाबाद अनुमंडल के पशुपालक

जनवरी से जून तक दाउदनगर से प्रतिदिन 50 पिकअप चारा पहुंचता है मोहम्मदगंज बाजार

जनवरी से जून तक दाउदनगर से प्रतिदिन 50 पिकअप चारा पहुंचता है मोहम्मदगंज बाजार प्रतिनिधि, मोहम्मदगंज हुसैनाबाद अनुमंडल के मोहम्मदगंज, हैदरनगर व हुसैनाबाद प्रखंड के किसान पालतू पशुओं की भूख मिटाने के लिए बिहार से आने वाले पशुचारे पर निर्भर हैं. खरीफ फसल की कटाई के बाद धान से निकलने वाला भूसा ही पशुओं का मुख्य आहार होता है. लेकिन अनुमंडल के अधिकांश मैदानी इलाकों में धान की पैदावार नहीं होती. पहाड़ी व जंगल क्षेत्रों की भूमि टांड़ और असमतल होने के कारण यहां खरीफ फसल का उत्पादन सीमित रहता है. इस कारण इन तीनों प्रखंडों के पशुपालकों को हर वर्ष करीब छह माह तक चारा संकट का सामना करना पड़ता है. बारिश के बाद उगने वाली हरियाली और घास से कुछ राहत मिलती है, लेकिन जनवरी से जून माह तक पशुपालक बिहार से आने वाले चारे पर ही निर्भर रहते हैं. दुधारू पशु ग्रामीण परिवारों की आजीविका का प्रमुख आधार हैं. समय पर चारा खिलाना और उससे प्राप्त दूध को बाजार में बेचकर परिवार का खर्च चलाना पशुपालकों के लिए चुनौतीपूर्ण कार्य बन जाता है. मॉनसून के आगमन तक बिहार से बड़े पैमाने पर चारा इन इलाकों में पहुंचता है, जिसकी खपत इन छह महीनों में सबसे अधिक होती है. मोहम्मदगंज बाजार में प्रतिदिन करीब 50 पिकअप पशुचारा बिहार से आता है. वाहन चालकों के अनुसार बिहार के दाउदनगर क्षेत्र से पलामू में चारा लाया जाता है. स्थानीय स्तर पर चारा उत्पादन कम होने के कारण इसकी मांग अधिक रहती है और आपूर्ति बिहार से की जाती है. वर्तमान में चारा 400 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिक रहा है. भाली गांव के पशुपालक लखन यादव ने बताया कि खरीफ फसल नहीं होने से हर साल चारा संकट उत्पन्न हो जाता है. पशुओं के लिए भोजन की व्यवस्था करना कठिन हो जाता है. मजबूरी में ऊंची कीमत पर चारा खरीदना पड़ता है. पोटो गांव के पशुपालक रामरेखा मेहता, रामचंद्र राम समेत कई किसानों ने कहा कि चारा संकट पशुपालन के लिए गंभीर समस्या बन चुका है और इस दिशा में ठोस पहल की जरूरत है.

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Published by: Akarsh aniket

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