Palamu: पक्का मकान दिखाकर आवास से किया वंचित, बारिश में खपरैल घर पर प्लास्टिक लगाकर परिवार रहने को मजबूर

पलामू के कांकेकला गांव में बबीता देवी का परिवार जर्जर घर में रहने को मजबूर है। आरोप है कि सरकारी रिकॉर्ड में पक्का मकान दिखाकर उन्हें आवास योजना से वंचित किया गया।


पाटन से रामनरेश तिवारी की रिपोर्ट Palamu News: पलामू जिले के पाटन प्रखंड के कांकेकला गांव की बबीता देवी का परिवार जर्जर मकान में रहने को विवश है. बारिश के दिनों में घर के छप्पर के उपर प्लास्टिक लगाकर रहते है. तेज बारिश में बैठकर रात बिताना पड़ता है. प्रशासनिक उपेक्षा के कारण आवास के लाभ से वंचित है. परिवार के पास रहने के लिए पक्का मकान तो दूर, सुरक्षित कच्चा मकान भी नहीं है. जर्जर खपरैल मकान में बबीता अपने पति, तीन बेटियों और एक बेटे के साथ किसी तरह जीवन गुजार रही हैं. मकान की हालत ऐसी है कि कभी भी धराशायी हो सकता है. बरसात में घर के अंदर पानी टपकता रहता है.

ग्रामसभा में पक्का मकान दिखाने का आरोप

बबीता देवी और उनके पति विनोद चंद्रवंशी का आरोप है कि पंचायत और संबंधित सरकारी कर्मियों की ओर से आयोजित ग्रामसभा में उनके नाम पर पक्का मकान दिखाकर उन्हें आवास योजना के लाभ से वंचित कर दिया गया, जबकि वास्तविकता यह है कि परिवार आज भी जर्जर खपरैल मकान में रहने को विवश है.

डीसी-बीडीओ को आवेदन पर भी नहीं मिला लाभ

बबीता और विनोद ने बताया कि आवास का लाभ दिलाने के लिए उन्होंने तत्कालीन उपायुक्त को दो बार तथा बीडीओ को तीन बार आवेदन दिया. इसके बावजूद अब तक उन्हें आवास का लाभ नहीं मिल सका. उनका कहना है कि अधिकारियों से गुहार लगाने के बावजूद उनके वास्तविक आवास की स्थिति की जांच तक नहीं की गई.

तत्कालीन उपायुक्त को दिया था शपथ पत्र

बबीता देवी और विनोद चंद्रवंशी ने संयुक्त रूप से तत्कालीन उपायुक्त समीरा एस के समक्ष शपथ पत्र भी दिया था. बताया जाता है कि उपायुक्त की ओर से मामले की जांच कराकर आवास योजना का लाभ दिलाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन परिवार का कहना है कि आश्वासन के बावजूद आज तक उन्हें आवास का लाभ नहीं मिला.

पक्का मकान मिलने पर सजा भुगतने को तैयार

बबीता और विनोद का कहना है कि कांकेकला गांव में उनके पास सिर्फ यही जर्जर कच्चा मकान है. देश के किसी भी कोने में उनके नाम से पक्का मकान होने की जांच कराई जा सकती है. यदि कहीं भी उनका पक्का मकान पाया जाता है, तो वे इसके लिए मिलने वाली सजा भुगतने को तैयार हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि जब उनके पास कहीं कोई पक्का मकान नहीं है, तो सरकारी रिकॉर्ड अथवा ग्रामसभा में उनके नाम पर पक्का मकान किस आधार पर दिखाया गया.

निष्पक्ष जांच की मांग

परिवार ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाय. यदि जांच में उनके नाम पर गलत तरीके से पक्का मकान दर्ज कर आवास से वंचित करने की बात सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाये.

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फोटो कैप्सन:घर के छप्पर के ऊपर व अंदर प्लास्टिक | Prabhat Khabar Network


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लेखक के बारे में

By कुमार विश्वत सेन

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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