अमानत बराज योजना को 947 करोड़ को मिली प्रशासनिक स्वीकृति

अमानत बराज योजना को 947 करोड़ को मिली प्रशासनिक स्वीकृति

वरीय संवाददाता, मेदिनीनगर राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर की पहल पर राज्य सरकार ने पलामू जिले की जीवनदायिनी अमानत बराज योजना के तीसरे पुनरीक्षित प्राक्कलन को मंजूरी देते हुए 947 करोड़ 26 लाख 71 हजार रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति मिल गयी. इस महात्वाकांक्षी सिंचाई परियोजना के पूर्ण होने से पलामू जिले के 65,200 हेक्टेयर सूखाग्रस्त कृषि क्षेत्र को सिंचाई के लिए भरपूर पानी मिलेगा. यह योजना मूल रूप से वर्ष 1973 में औरंगा जलाशय के नाम से 41.67 करोड़ रुपये के शुरुआती बजट के साथ शुरू हुई थी, जिसमें अब आंशिक संशोधन कर केवल अमानत बराज और उससे जुड़ी नहर प्रणालियों के निर्माण को पूरा किया जा रहा है. यह योजना मृतप्राय: हो गया था. पिछले दिनों विभागीय मुख्य अभियंता के साथ वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर उच्च स्तरीय बैठक कर पाइप लाइन बिछाने की तकनीकी व जमीन संबंधित विवादों के त्वरित निष्पादन पर सहमति मनी. इस परियजना को पूर्ण होने पर 400 किलोमीटर पाइप लाइन व 800 आउटलेट के माध्यम से 74 गांवों के करीब 23 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी. पांच दशकों का लंबा सफर के कारण होता रहा बजटीय बदलाव इस परियोजना का इतिहास उतार-चढ़ाव से भरा रहा है, जिसके कारण इसके बजट में समय-समय पर बढ़ोतरी करनी पड़ी. वर्ष 1973 में केंद्रीय जल आयोग की हरी झंडी के बाद, वर्ष 1983 में योजना आयोग के निर्देश पर इसका पहला पुनरीक्षित बजट 125 करोड़ 40 लाख रुपये किया गया. इसके बाद भी जब 20 वर्षों तक कार्य में कोई खास प्रगति नहीं हुई, तब जल संसाधन विभाग और केंद्रीय जल आयोग ने औरंगा जलाशय के मूल प्रावधान को रद्द कर दिया। इसके स्थान पर वर्ष 2003 में अमानत बराज और 89.91 किलोमीटर लंबी औरंगा दायां मुख्य नहर के निर्माण के लिए 341 करोड़ 10 लाख रुपये की द्वितीय पुनरीक्षित स्वीकृति दी गयी थी. पलामू के किसानों को मिलेगा अपेक्षित लाभ वर्तमान में मिली 947 करोड़ से अधिक की राशि से इस परियोजना के बचे हुए निर्माण कार्यों को तेज गति से पूरा किया जायेगा.इस नये चरण के तहत मुख्य अमानत बराज के साथ-साथ उससे निकलने वाली औरंगा दायां मुख्य नहर के जीरो आरडी से लेकर 295 आरडी तक के मुख्य नहर और उसकी छोटी वितरण नहरों (लघु नहरों) का निर्माण कार्य संपन्न कराया जाना है. इस राशि की प्रशासनिक स्वीकृति मिलने से पलामू के हजारों किसान परिवारों में खुशी की लहर है, क्योंकि इसके चालू होने से क्षेत्र का पुराना सूखाग्रस्त संकट हमेशा के लिए समाप्त हो जायेगा. नयी तकनीक से खेतों तक पहुंचेगा पानी इस परियोजना से खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचाने के मार्ग में आने वाली वन विभाग की आपत्तियों और रैयती जमीन के अधिग्रहण की समस्याओं को अब नई तकनीक से दूर किया जायेगा. सरकार ने अब पारंपरिक नहरों के बजाय भूमिगत पाइपलाइन के सहारे सीधे खेतों तक पानी पहुंचाने का फैसला किया है, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचे बिना कम समय में काम पूरा हो सकेगा. इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने के लिए पिछले दिनों विभागीय मुख्य अभियंता के साथ मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने एक उच्च स्तरीय बैठक की थी. इस विचार-विमर्श में पाइपलाइन बिछाने की तकनीकी बारीकियों और जमीन संबंधी विवादों के त्वरित निपटारे पर सहमति बनी, जिससे किसानों को सिंचाई के लिए भटकना नहीं पड़ेगा.

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Author: Akarsh Aniket

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