पाकुड़िया: झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र में महेशपुर विधायक प्रो. स्टीफन मरांडी ने खान एवं भूतत्व विभाग से जुड़े महत्वपूर्ण मामले को अल्पसूचित प्रश्न के माध्यम से सदन में उठाया. उन्होंने झारखंड लघु खनिज समनुदान नियमावली, 2004 (यथा संशोधित) के नियम 55 को यथावत रखने की मांग सरकार के समक्ष रखी.
विधायक ने सरकार से सवाल किया कि क्या मिट्टी और मोरम से संबंधित लाइसेंस निर्गत नहीं किया जाता है. उन्होंने यह भी जानना चाहा कि नियमावली के नियम 55 को विलोपित किए जाने के बाद मिट्टी, मोरम और बालू जैसे लघु खनिजों की रॉयल्टी चालान के माध्यम से जमा करना अनिवार्य हो गया है या नहीं.
उन्होंने सदन में यह भी सवाल उठाया कि नियम 55 के प्रभावी रहने के दौरान यदि कोई संवेदक रनिंग अकाउंट बिल के साथ रॉयल्टी चालान प्रस्तुत नहीं कर पाता था, तो रॉयल्टी राशि के समतुल्य दंड राशि जमा कर भुगतान प्राप्त करने का प्रावधान था या नहीं.
नियम 55 को दोबारा यथावत रखने के संबंध में स्पष्ट करे विचार
सरकारी योजनाओं में रॉयल्टी से जुड़ी परेशानियों को देखते हुए विधायक ने सरकार से नियम 55 को दोबारा यथावत रखने के संबंध में विचार स्पष्ट करने को कहा. जवाब में मंत्री ने बताया कि नियम 55 से संबंधित निर्णय कैबिनेट की बैठक में लिया गया था. आगामी बैठक में नियम 55 को यथावत रखने के संबंध में विभाग निर्णय लेगा.
55 को यथावत रखने से कम होंगी परेशानियां
विधायक प्रो. स्टीफन मरांडी ने कहा कि नियम 55 को यथावत रखने से संवेदकों की परेशानियां कम होंगी और सरकारी विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी. उन्होंने इस पहल के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रति आभार जताया. उन्होंने कहा कि इसका लाभ पाकुड़ सहित पूरे झारखंड में विकास कार्यों से जुड़े संवेदकों को मिल सकेगा.
