प्रतिनिधि, पाकुड़. जिला मुख्यालय में शनिवार को करमा पर्व उत्साह और धूमधाम के साथ मनाया गया. लोगों ने विधि-विधान से करम देवता की पूजा-अर्चना की. महिलाओं और बच्चों ने पारंपरिक गीतों पर नृत्य कर पर्व की खुशियां मनायीं. शहर के बड़ी अलीगंज में भुइयां रेजीमेंट सामाजिक संस्था की ओर से करमा पर्व का आयोजन किया गया.
कार्यक्रम स्थल पर आकर्षक तोरण द्वार बनाया गया था. बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे और पुरुष पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे. महिलाएं करम की डाली लेकर पूजा स्थल पर पहुंचीं, जिसके बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गयी. इस दौरान गाजे-बाजे के साथ लोगों ने नृत्य किया.
प्रकृति, भाई-बहन के प्रेम और अच्छे कर्म का संदेश
भुइयां रेजीमेंट के संस्थापक सह अधिवक्ता मोहन कुमार राय ने बताया कि करमा पर्व प्रकृति, वृक्ष और कृषि से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है. करम वृक्ष की डाली को जीवन, हरियाली और धरती की शक्ति का प्रतीक माना जाता है. किसान अच्छी फसल और खेतों में हरियाली के लिए करम देवता से प्रार्थना करते हैं.
उन्होंने कहा कि करमा पर्व भाई-बहन के प्रेम और आपसी स्नेह का भी प्रतीक है. बहनें भाइयों की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना करते हुए व्रत रखती हैं. कर्म देवता की आराधना के माध्यम से अच्छे कर्म करने और प्रकृति के साथ संतुलन बनाये रखने का संदेश भी दिया जाता है.
मोहन कुमार राय ने बताया कि बड़ी अलीगंज में लंबे समय से करमा पर्व मनाया जा रहा है. इस बार भी संस्था की ओर से आयोजन किया गया. करमा पर्व मुख्य रूप से तीन दिनों तक चलता है और एकादशी के दिन करम डाली की पूजा की जाती है. पाकुड़ और साहिबगंज जिले में इस वर्ष शनिवार को करमा पर्व मनाया गया.
