पाकुड़: पश्चिम बंगाल के मोरग्राम-किशनगंज हाइस्पीड कॉरिडोर परियोजना के विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) को लेकर मंगलवार को समाहरणालय में उपायुक्त मेघा भारद्वाज की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक हुई. बैठक में पाकुड़ विधायक निसात आलम भी उपस्थित रहीं.
एनएचएआई की परामर्शी संस्था एम/एस वॉयंट्स सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधियों ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से परियोजना की रूपरेखा प्रस्तुत की. इस दौरान प्रस्तावित कॉरिडोर के संभावित अलाइनमेंट, सड़क की तकनीकी संरचना, पुल-पुलियों के निर्माण, भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय प्रभाव सहित अन्य तकनीकी एवं प्रशासनिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई.
बताया गया कि प्रस्तावित हाई स्पीड कॉरिडोर का 13.83 किलोमीटर हिस्सा पाकुड़ जिले से होकर गुजरेगा, जिससे जिले के 19 गांव प्रभावित होंगे. परियोजना के लिए आवश्यक सर्वेक्षण कार्य प्रगति पर है और निर्धारित मानकों के अनुरूप डीपीआर तैयार की जा रही है.
बैठक में विधायक निसात आलम ने कहा कि यह परियोजना क्षेत्र के समग्र विकास, बेहतर सड़क संपर्क और आर्थिक गतिविधियों को नई गति देगी. उन्होंने डीपीआर तैयार करते समय स्थानीय आवश्यकताओं एवं जनहित को प्राथमिकता देने तथा भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में प्रभावित ग्रामीणों के हितों का विशेष ध्यान रखने पर जोर दिया.
उपायुक्त मेघा भारद्वाज ने संबंधित विभागों को परियोजना से जुड़े सभी अभिलेख, सूचनाएं और विभागीय प्रतिवेदन निर्धारित समय-सीमा के भीतर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए भूमि अधिग्रहण, राजस्व, विद्युत, पेयजल, सड़क सहित अन्य आधारभूत संरचनाओं से संबंधित आवश्यक सुझाव समय पर उपलब्ध कराएं, ताकि डीपीआर तकनीकी रूप से सुदृढ़, व्यवहारिक और जनहितकारी बन सके.
उन्होंने कहा कि इस परियोजना से आधुनिक परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा तथा व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे. बैठक में उप विकास आयुक्त अरविंद कुमार लाल सहित विभिन्न विभागों के पदाधिकारी उपस्थित थे.
