रांची यूनिवर्सिटी में पीएचडी के लिए नया रेगुलेशन जारी, 2026-27 से होगा लागू

रांची विवि ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से नई पीएचडी गाइडलाइन लागू कर दी है. यूजीसी रेगुलेशन 2022 के तहत तैयार नियमों में प्रवेश परीक्षा, गाइड की सीमा, योग्यता और पीएचडी पूरी करने की समय-सीमा समेत कई प्रावधान किए गए हैं.

संजीव सिंह की रिपोर्ट

Jharkhand Education: रांची विवि में पीएचडी करने का रास्ता साफ हो गया है. विवि प्रशासन ने बुधवार को रेगुलशन एंड स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिड्यूर फॉर द मिनिमम स्टैंडर्ड एंड प्रोसिड्यूर फॉर अवार्ड ऑफ पीएचडी डिग्री-2026 की अधिसूचना जारी कर दी है. इसे शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू किया गया है. कुलपति प्रो सरोज शर्मा के निर्देशन और विवि के सोशल साइंस डीन सह रिसर्च डायरेक्टर डॉ परवेज हसन की देख-रेख में कमेटी ने यूजीसी रेगुलेशन 2022 के तहत रेगुलेशन को 1 माह 9 दिन के अंदर तैयार कर इसे लागू कर दिया. इसे नई शिक्षा नीति और 4 वर्षीय स्नातक प्रोग्राम के तहत तैयार किया गया है. इस रेगुलेशन के मुताबिक विवि अब पीएचडी रजिस्ट्रेशन के लिए प्रवेश परीक्षा लेने के लिए स्वतंत्र है.

वहीं, इसके मुताबिक एक प्रोफेसर अपने निर्देशन में 8, एसोसिएट प्रोफेसर 6 और असिस्टेंट प्रोफेसर 4 अभ्यर्थियों को एक समय में पीएचडी करा सकेंगे. पीएचडी के लिए अभ्यर्थी को स्नातकोत्तर में कम से कम 55 प्रतिशत अंक से उत्तीर्ण होना होगा. जबकि एसटी/एससी और ओबीसी के लिए 5 प्रतिशत की छूट रहेगी. थिसिस जमा करने के लिए न्यूनतम 3 वर्ष और अधिकतम 6 वर्ष निर्धारित किया गया है. किसी कारणवश निर्धारित समय पर थिसिस जमा नहीं होने पर 2 वर्ष का विस्तार अधिकतम 8 वर्ष के लिए किया जा सकता है महिला के लिए भी विशेष छूट दी गई है पीएचडी कराते समय अगर शिक्षक सेवानिवृत्त हो जाते हैं, तो वे गाइड की जगह को-गाइड बन जाएंगे. अभ्यर्थी को नियमानुसार गाइड बदलने की छूट रहेगी.

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13 सदस्यीय कमेटी ने रेगुलेशन तैयार करने में किया था मंथन

रांची विवि में पीएचडी रेगुलेशन तैयार करने के लिए कुलपति प्रो सरोज शर्मा के निर्देशन में 13 सदस्यीय उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया गया था. रेगुलेशन के स्वीकृत नहीं होने के कारण पिछली बार पीएचडी प्रवेश परीक्षा लेने पर राज्यपाल ने रोक लगा दी थी. साथ ही राज्यपाल ने विवि को यूजीसी रेगुलेशन 2022 के तहत रेगुलेशन बनाने का निर्देश दिया था. इसके बाद विवि के प्रवेश परीक्षा के लिए आवेदन के साथ मंगाये गए प्रति अभ्यर्थी 2000 रुपये शुल्क वापस करने पड़े थे.

निपा नई दिल्ली के निदेशक प्रो पीके मिश्रा अध्यक्ष थे. जबकि कमेटी के गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ विवि नई दिल्ली के प्रो गुलशन धमीजा, सेंट्रल यूनिवर्सिटी राजस्थान के निदेशक प्रो बीसी महापात्रा, हेमवती नंदन बहुगुणा विवि श्रीनगर उत्तराखंड की प्रो सीमा धवन, रांची विवि के डीएसडब्ल्यू डॉ सुदेश कुमार साहू, विवि के रिसर्च डायरेक्टर डॉ परवेज हसन, रांची विवि के रजिस्ट्रार डॉ राजकुमार शर्मा, कॉमर्स के प्राध्यापक और वर्तमान में आईएमएस के निदेशक डॉ एमएन जुबैरी, पीजी भौतिकी विभाग के डॉ नीरज, पीजी रसायनशास्त्र विभाग के प्राध्यापक डॉ राजकुमार सिंह, पीजी अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ ज्योति प्रकाश, अंग्रेजी विभाग के डॉ सुमीत कुमार डे, कुरमाली विभाग के डॉ तारकेश्वर सिंह मुंडा शामिल हैं.


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लेखक के बारे में

By अर्चना कुजूर

अर्चना कुजूर एक डिजिटल पत्रकार और कंटेंट राइटर हैं, जो वर्तमान में प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में कार्यरत हैं. वह झारखंड डेस्क के रांची एडिशन के अंतर्गत आने वाले विभिन्न जिलों के साथ-साथ राज्य की प्रमुख राजनीतिक, सामाजिक, प्रशासनिक और जनसरोकार से जुड़ी खबरों को कवर करती हैं. अर्चना ने वर्ष 2016 में क्राफ्ट फिल्म स्कूल, रोहिणी (नई दिल्ली) से टीवी जर्नलिज्म एंड न्यूज रीडिंग में एक वर्षीय डिप्लोमा किया. इसके बाद उन्होंने नोएडा स्थित नेशनल वॉयस न्यूज और इंडिया वॉयस न्यूज चैनल (इलेक्ट्रॉनिक मीडिया) में इंटर्नशिप करने के साथ-साथ व्यावहारिक पत्रकारिता का अनुभव हासिल किया.

झारखंड लौटने के बाद उन्होंने कशिश न्यूज चैनल में लगभग डेढ़ वर्ष तक आउटपुट विभाग में कॉपी राइटर के रूप में कार्य किया. इसके बाद रांची एक्सप्रेस में एजुकेशन बीट पर रिपोर्टिंग की और प्रिंट पत्रकारिता का अनुभव हासिल किया. वर्ष 2022 से उन्होंने न्यूज11 भारत और नक्षत्र न्यूज चैनल में लगभग दो-दो वर्षों तक डिजिटल कंटेंट राइटर के रूप में कार्य करते हुए राज्य की राजनीति, शिक्षा, रोजगार, प्रशासन, योजनाओं और समसामयिक विषयों पर हजारों समाचार और विशेष लेख लिखें.

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