ओलावृष्टि से प्रभावित तीन हजार परिवार मुआवजे की आस में

ओलावृष्टि के कहर से तीन महीने बाद भी प्रभावित परिवारों को सरकारी मुआवजे का इंतजार है.

भंडरा. 21 मार्च को भंडरा प्रखंड क्षेत्र में ओलावृष्टि के कहर से तीन महीने बाद भी प्रभावित परिवारों को सरकारी मुआवजे का इंतजार है. इस प्राकृतिक आपदा में जहां सैकड़ों किसानों की फसलें तबाह हो गयीं, वहीं लगभग 2000 परिवारों के घरों के छप्पर और एस्बेस्टस छत बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गये थे. मुआवजा न मिलने के कारण अब लोग अपने टूटे घरों की मरम्मत के लिए आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं, क्योंकि मानसून की बारिश सिर पर है. ओलावृष्टि के तुरंत बाद, बीडीओ प्रतिमा कुमारी और सीओ दुर्गा कुमार ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर लोगों को सरकारी मुआवजे का आश्वासन दिया था. प्रभावित परिवारों को सीओ कार्यालय में आवेदन जमा करने के निर्देश दिये गये थे और कई पंचायतों व गांवों में शिविर लगाकर आवेदन भी लिए गए थे. सरकारी कर्मियों के इस आश्वासन से लोगों में यह आशा जगी थी कि आपदा प्रबंधन के तहत उन्हें जल्द ही मुआवजा मिलेगा और वे अपने घरों की मरम्मत तथा फसल व अन्य हानियों की भरपाई कर पायेंगे. हालांकि, तीन महीने बीत जाने के बाद भी आपदा प्रबंधन से प्रभावित परिवारों को अभी तक कोई मुआवजा नहीं मिला है. मौसम विभाग के अनुसार, जून महीने के दूसरे सप्ताह से मानसून की बारिश शुरू हो जायेगी, जिससे लोगों की चिंता बढ़ गयी है. उन्हें डर है कि यदि बरसात से पहले घरों की मरम्मत नहीं होती है, तो उन्हें भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा. यदि समय पर मुआवजा मिल जाता, तो वे अपने घरों की मरम्मत आसानी से करवा पाते. मुआवजे में देरी और टूटते घरों को देखते हुए, कई प्रभावित परिवारों ने अपने स्तर पर मरम्मत का काम शुरू कर दिया है. आर्थिक संकट का सामना करते हुए भी, लोग अपने आशियानों को दुरुस्त करने में लगे हैं. कुछ परिवारों को तो अपने पालतू मवेशियों को बेचना पड़ रहा है, तो कुछ ने खेत गिरवी रखकर घरों की मरम्मत का खर्च उठाया है. समय पर मुआवजा न मिलने से प्रभावित परिवारों की समस्याएं और भी बढ़ गयी है. यह विडंबना है कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों को आपदा की मार झेलनी पड़ी है, फिर भी किसी भी जनप्रतिनिधि या पंचायत प्रतिनिधि को उनकी समस्याओं की चिंता नहीं है. लोगों का कहना है कि यदि समय पर मुआवजे की राशि मिल जाती, तो प्रभावित घरों की मरम्मत हो जाती और उन्हें कुछ सहयोग मिल जाता. प्रभावित परिवार अभी भी मुआवजे की आस में हैं, ताकि वे अपने घरों को फिर से बसा सके.

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Published by: Anuj singh

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