किस्को़ प्रखंड क्षेत्र के किसानों के खेतों में इन दिनों हरियाली छायी हुई है. रबी की लहलहाती फसलों को देख किसान खुश तो हैं, लेकिन भविष्य की चिंता भी उन्हें सता रही है. गेहूं, प्याज, खीरा, कद्दू, मक्का और चने की जोरदार पैदावार की उम्मीद में किसानों की फसलें परवान पर हैं. विशेषकर जनवल स्थित पोगड़ो बांध और जोरी तालाब के सहारे 50 एकड़ तथा हेसापिढ़ी के शूकरी नाला डैम के भरोसे 25 एकड़ से अधिक भूमि पर गेहूं की फसल लगायी गयी है. सिंचाई की समुचित व्यवस्था का अभाव : किसानों का कहना है कि प्रखंड में सरकार द्वारा सिंचाई की पुख्ता व्यवस्था नहीं की गयी है. वर्तमान में किसान पूरी तरह तालाबों और डैमों के भरोसे हैं. गर्मी की दस्तक के साथ ही जलस्रोत सूखने लगे हैं. अगर आने वाले दिनों में बारिश नहीं हुई, तो गेहूं की लहलहाती फसल नष्ट हो सकती है. किसानों ने बताया कि अब तक जलाशयों के पानी से सिंचाई की गयी है, लेकिन अब पानी का स्तर तेजी से नीचे जा रहा है. प्रकृति पर टिकी हैं निगाहें : किसानों की मानें तो पिछले कुछ वर्षों से हो रहे लगातार नुकसान के बाद इस बार फसलें बेहतर दिख रही हैं. अब तक किसी बड़े रोग या प्राकृतिक आपदा का प्रकोप नहीं हुआ है. यदि प्रकृति ने साथ दिया और बीच-बीच में बारिश हुई, तो वर्षों बाद किसानों के चेहरे पर मुस्कुराहट लौटेगी. किसानों का स्पष्ट कहना है कि यदि सरकार प्रखंड में 12 महीने सिंचाई की व्यवस्था सुनिश्चित कर दे, तो वे अपनी आय दोगुनी करने में सक्षम होंगे. फिलहाल, किसान बेहतर पैदावार के लिए आसमान की ओर टकटकी लगाये बैठे हैं.
किस्को के खेतों में लहलहा रही रबी की फसल, सिंचाई के संकट से किसान चिंतित
किस्को के खेतों में लहलहा रही रबी की फसल, सिंचाई के संकट से किसान चिंतित
