लोहरदगा. आदिवासी पारंपरिक बहुस्तरीय व्यवस्था ने सीनियर आइआरएस अधिकारी निशा उरांव के नेतृत्व में उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर पांचवीं अनुसूची क्षेत्र के तहत पारंपरिक ग्राम सभाओं, रूढ़िजन्य कानूनों और धार्मिक-सांस्कृतिक अधिकारों के संरक्षण की मांग की है. प्रतिनिधिमंडल ने मॉडल ग्रामसभा के नाम पर बन रहे गैर-पारंपरिक नये पदों (जैसे सचिव, कोषाध्यक्ष) का विरोध करते हुए केवल पारंपरिक प्रधान, हातु मुंडा, महतो, पाहन और पाइनभरा वाली व्यवस्था को ही मान्यता देने की मांग की है. इसके साथ ही ग्राम प्रधान व पाहन जैसे पदों को धार्मिक-सांस्कृतिक बताते हुए कहा गया कि धर्मांतरित व्यक्ति इन पदों के पात्र नहीं हैं, उन्हें पदमुक्त किया जाये. ज्ञापन में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देकर बिना ग्रामसभा की अनुमति के गांवों में होने वाली चंगाई सभाओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की गयी है. साथ ही, धर्म बदलने वाले पाहनों के कब्जे से भुईहरी / पहनाई भूमि वापस लेकर ग्रामसभा को सौंपने और धन-बल पर बने गैर-पारंपरिक फर्जी पड़हा संगठनों को सरकारी मान्यता नहीं देने की अपील की गयी है. नयी ग्राम सभाओं के गठन की टीम और पेसा कोष संचालन में भी पारंपरिक पदाधिकारियों को शामिल करने की मांग की गयी है.
पेसा कानून और पारंपरिक व्यवस्था को लेकर निशा उरांव ने डीसी को सौंपा ज्ञापन
पेसा कानून और पारंपरिक व्यवस्था को लेकर निशा उरांव ने डीसी को सौंपा ज्ञापन
