लोहरदगा: पर्यावरण की सुरक्षा और शुद्धता के लिए हवन-यज्ञ भारतीय संस्कृति की प्राचीन परंपरा है. इसके माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुंचाया जा रहा है. यह बातें गुरुकुल शांति आश्रम के निदेशक आचार्य शरत चंद्र आर्य ने कहीं.
गुरुकुल शांति आश्रम के तत्वावधान में चल रहे वेद प्रचार सप्ताह के तहत बदला गांव में हवन, प्रवचन और संगीत कार्यक्रम का आयोजन किया गया. आर्य वीरांगनाओं और बालवाड़ी शिक्षिकाओं के मार्गदर्शन में ग्रामीणों और बच्चों को वेदों की जानकारी दी गयी. इसके बाद हवन कराया गया.
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रवींद्र दत्ता ने लोगों से प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूक रहने और पर्यावरण को सुरक्षित रखने की अपील की. कार्यक्रम में लाल बालकिशोर शाहदेव, मिथलेश पाठक, सुखदेव मुंडा, सरिता, नीलू, सृष्टि, अनुराधा, प्रीति, अर्चना, सुमंती, सुबोध, देवेश्वर यादव, छोटू, नितेश और अंकिता समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए.
बच्चों ने संगीत सहित विभिन्न गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया. कार्यक्रम के समापन पर बच्चों के बीच पेन, पेंसिल, रबर, कटर और टॉफी-मिठाइयां वितरित की गयीं. इसके बाद पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता से जुड़े नारे लगाकर कार्यक्रम का समापन किया गया.
