लोहरदगा: लोहरदगा चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष रितेश कुमार ने वन विभाग पर जैविक उद्यान के निर्माण और कैंटीन आवंटन में गंभीर अनियमितता का आरोप लगाया है. चैंबर ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा कैंटीन आवंटन की प्रक्रिया रद्द कर दोबारा निविदा कराने की मांग की है.
चैंबर की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित जैविक उद्यान को जनता के लिए खोले हुए अभी एक माह भी पूरा नहीं हुआ है. उद्यान के निर्माण एवं देखरेख के लिए एक क्षेत्रीय वन पदाधिकारी को अधिकृत किए जाने की बात भी कही गयी है. चैंबर ने उद्यान का निर्माण और समय पर जनता को समर्पित किया जाना सराहनीय बताया, लेकिन निर्माण कार्य की गहराई से जांच कराने की मांग की है.
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बिल और जीएसटी को लेकर सवाल
विज्ञप्ति में आरोप लगाया गया है कि निर्माण कार्य के दौरान आपूर्तिकर्ता से मिलीभगत कर ऐसे बिल विभाग को सौंपे गये, जिनमें लाखों रुपये के जीएसटी से जुड़ी अनियमितता की आशंका है. कुछ बिलों में ऐसे सामान की खरीद दर्शाये जाने का भी दावा किया गया है, जिसकी वास्तविक खरीद और जीएसटी भुगतान को लेकर सवाल उठ रहे हैं. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
4500 रुपये मासिक पर कैंटीन आवंटन पर सवाल
चैंबर ने जैविक उद्यान की कैंटीन के हाल में हुए बिड को लेकर भी सवाल उठाये हैं. आरोप है कि कैंटीन का आवंटन कथित आपसी सेटिंग के तहत उसी आपूर्तिकर्ता को किया गया, जिस पर पूर्व में विभागीय कार्यों में अनियमितता के आरोप लगाये गये हैं.
चैंबर के अनुसार उद्यान में बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं और बाहर से खाद्य सामग्री ले जाने पर रोक होने के कारण कैंटीन का कारोबार महत्वपूर्ण है. इसके बावजूद कैंटीन को महज 4500 रुपये प्रतिमाह की दर पर आवंटित किये जाने पर सवाल उठाया गया है.
लोहरदगा चैंबर ऑफ कॉमर्स ने वन विभाग के वरीय अधिकारियों से जैविक उद्यान के निर्माण से जुड़ी सभी वित्तीय एवं तकनीकी प्रक्रियाओं की निष्पक्ष जांच कराने, कथित जीएसटी अनियमितताओं की जांच करने तथा कैंटीन आवंटन प्रक्रिया की समीक्षा कर दोबारा निविदा कराने की मांग की है. चैंबर ने कहा कि जांच के बाद ही लगाए गये आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी.
