खुले में शौच की प्रथा को बंद करें: डीडीसी
लोहरदगा : स्वच्छता में ईश्वर का वास होता है. तमाम बीमारियों की जड़ अस्वच्छता है. स्वच्छता अपना कर ही बहुत कुछ हासिल कर सकते हैं. ये बातें उपायुक्त विनोद कुमार ने समाहरणालय परिसर के मेसो भवन में स्वच्छ भारत मिशन के तहत ओडीएफ वेरीफिकेशन को लेकर आयोजित कार्यशाला में कही. उपायुक्त ने कहा कि लोहरदगा जिला को खुले में शौचमुक्त बनाने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सजग है. सभी के प्रयास से पूरे राज्य में लोहरदगा जिला को खुले में शौचमुक्त जिला बना कर पहले स्थान पर लाना जिला प्रशासन का लक्ष्य है.
उन्होंने कहा कि खुले में शौचमुक्त बनाने के लिए सभी अधिकारियों एवं कर्मियो को कड़ी मेहनत करने की आवश्यकता है. उपायुक्त ने कहा कि समाज में बदलाव लाने के लिए सभी को आगे आने की जरूरत है. जब तक लोग अपने व्यवहार में परिवर्तन नहीं लायेंगे, तब तक हमारा अभियान सफल नहीं होगा. यह एक अभियान है और इस अभियान में तमाम लोगों की भागीदारी निश्चित रूप से होनी चाहिए. कुपोषण, रक्त अल्पता, मलेरिया, फाइलेरिया, डायरिया, हैजा एवं पोलिया का मुख्य कारण अस्वच्छता है. खुले में शौच की प्रक्रिया इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. उन्होंने कहा कि यदि इस अभियान के तहत हम लोगों को खुले में शौच जाने से रोक सकें, तो यह जिला ही नहीं, बल्कि राज्य के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि होगी और इस कार्य को हमें हर हाल में करना है. भारत सरकार शौचालय निर्माण के लिए 12 हजार प्रोत्साहन राशि दे रही है.
तमाम लोग अपने घरों में न सिर्फ शौचालय का निर्माण करें, बल्कि उसका उपयोग भी करें. मौके पर डीडीसी दानियल कंडुलना ने कहा कि खुले में शौच की प्रथा को बंद करना होगा. तमाम लोग अपने घरों में शौचालय का निर्माण करा कर उसका उपयोग करें. मौके पर यूनिसेफ के प्रेमचंद ने कहा कि लोहरदगा जिला में शौचालय निर्माण का काम प्रगति पर है और यह अभियान तभी सफल हो सकता है, जब तमाम वर्ग के लोगों की भागीदारी इसमें हो. पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता रेयाज आलम ने लोहरदगा जिला में शौचालय निर्माण की प्रगति के संबंध में जानकारी दी. इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ उपायुक्त एवं उपविकास आयुक्त ने किया.
मौके पर आइटीडीए निदेशक रवींद्र कुमार सिंह, सिविल सर्जन पैट्रिक टेटे,एलजीएसएस के सचिव चंद्रपति यादव, सभी प्रखंडों के बीडीओ, सीओ, पेयजल स्वच्छता विभाग के सहायक अभियंता गोविंद कच्छप, कनीय अभियंता जहींद्र भगत, पंकज पिंगुआ, सचिंद्र मोहन झा, रोहित उरांव, सुमन राज खलखो, संजय कुमार, परवेज आलम, रवींद्र सिंह, उर्वशी कुमारी, अरविंद कुमार, रविशंकर प्रसाद मंडल व मो राशिद सहित विभिन्न स्वयंसेवी संस्थानों के वोलेंटियर मौजूद थे.
