कुड़ू : प्राचीन शिव मंदिर महादेव मंडा को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का मामला अधर में लटक गया है. पर्यटन विभाग की टीम ने चार साल पहले महादेव मंडा का सर्वेक्षण किया था. पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की तमाम संभावनाओं की जानकारी ली गयी थी. विभाग ने माना था कि महादेव मंडा को पर्यटन स्थल के रूप मे विकसित किया जा सकता है. इससे विभाग को राजस्व मिलेगा, ग्रामीणों को रोजगार मिलेगा.
कुड़ू प्रखंड की सलगी पंचायत के घने जंगलों के बीच प्राचीन शिव मंदिर महादेव मंडा स्थित है. तत्कालीन विधायक कमल किशोर भगत ने वर्ष 2011 में विधानसभा में महादेव मंडा को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का मामला उठाया था.
सरकार ने इसे पूरा करने का आश्वासन दिया था. पर्यटन मंत्रालय के निदेशक वर्ष 2012 में महाशिवरात्रि के मौके पर पूरी टीम के साथ महादेव मंडा पहुंचे थे. महादेव मंडा का जायजा लिया और बताया था कि रिपोर्ट सरकार को एवं पर्यटन मंत्रालय को सौंपी जायेगी. तत्कालीन विधायक कमल किशोर भगत ने तत्कालीन पर्यटन मंत्री बैजनाथ राम से मिल कर महादेव मंडा को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग की थी. मंत्री ने वर्ष 2013 में घोषणा की कि महादेव मंडा पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होगा.
बताया जाता है कि पर्यटन विभाग ने महादेव मंडा को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए जमीन का ब्योरा एवं कम से कम तीन एकड़ जमीन की मांग की थी. इसके बाद कुड़ू अंचल प्रशासन ने पर्यटन विभाग को तीन एकड़ जमीन कुड़ू वन विभाग से अनुमति लेकर आवंटित कर दी.
पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए विभाग की तरफ से चहारदीवारी निर्माण, श्रद्धालुओं के बैठने के लिए जगह-जगह बेंच बनाने, ऊपर तक जाने के लिए सीढ़ी का निर्माण, ग्रामीणों को रोजगार देने के लिए शेड रूपी दुकान का निर्माण एवं श्रद्धालुओं के लिए शौचालय निर्माण समेत कई काम का प्रस्ताव भेजा गया. वर्ष 2013 में पर्यटन विभाग से दो यात्री शेड का निर्माण एवं वर्ष 2014 में जिला प्रशासन से शौचालय का निर्माण कराया गया है. इसके अलावा पिछले चार साल में कोई काम नही हो पाया है. ज्ञात हो कि महादेव मंडा में कुड़ू प्रखंड के अलावा दूरदराज के लोग पूजा-अर्चना करने आते हैं. महादेव मंडा में महाशिवरात्रि व श्रावण माह में विशेष पूजा का आयोजन होता है.
