किस्को : स्वच्छ भारत मिशन के तहत चल रहे लगातार जागरूकता कार्यक्रम के कारण किस्को प्रखंड क्षेत्र में काफी बदलाव दिखने लगा है. प्रखंड क्षेत्र की नवाडीह पंचायत में एक साल पूर्व सड़क, दोन व टाड़ में शौच करनेवालों की भीड़ देखी जाती थी, लेकिन अब यह जगह साफ-सुक्षरा नजर आ रहा है. यहां गंदगी अब नहीं के बराबर है. हालांकि अभी भी लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है. 2012 बेसलाइन सर्वे के दौरान नवाडीह पंचायत में 1580 शौचालय की स्वीकृति मिली थी. इसमें 1008 शौचालय पूर्ण हो चुका है. अन्य का काम चल रहा है.
शौचालय के फायदे के बारे में जानकारी नहीं थी
ग्रामीण गोपाल, रामचंद्र, महेश्वर, रामदास, सोमारी व एतवरिया का कहना है कि उनलोगों को शौचालय के फायदे के बारे में जानकारी नहीं थी. हमलोग शौचालय को घर के निकट नहीं बनाना चाहते थे. कोई भी शौचालय से निकल कर आता था, तो उसके संपर्क में नहीं आते थे.
दो लाख के मकान बनाते थे, नहीं बनाते थे 12 हजार के शाैचालय : पीएचइडी के जेइ का कहना है कि लोगों को जानकारी नहीं थी कि शौचालय का उपयोग किस तरह लाभदायक होता है. वे मकान दो लाख रुपये का बनाते थे, लेकिन 12 हजार के शौचालय बनाना नहीं चाहते थे. ग्रामीणों को बाहर जाने की आदत थी. अब लोग धीरे -धीरे जागरूक हो रहे हैं.
जेइ का कहना है कि मार्च 2017 तक पूरे जिले को शौच से मुक्त करना है. इस साल के अंत तक किस्को प्रखंड के सभी क्षेत्र शौचमुक्त हो जायेंगे. मुखिया मंगरी असुर का कहना है कि लोगों को सिर्फ शौचालय का अर्थ पता होता , तो अभी तक हमारा देश शौचमुक्त हो जाता. अब लोग जागरूक हो रहे हैं आैर स्वयं शौचालय बनाने के लिए तैयार हो रहे हैं.
