लोहरदगा: अटल विचार मंच के तत्वावधान में नगर भवन में झारखंड की चुनौतियां व समाधान विषय पर सेमिनार लगाया गया. सेमिनार में बड़ी संख्या में जिले के बुद्धिजीवी वर्ग के लोग उपस्थित थे. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री सघनू भगत ने कहा कि झारखंड सरकार की कार्य संस्कृति का बिगड़ जाना आज सबसे बड़ी चुनौती है. जनप्रतिनिधि कुर्सी की शोभा बढ़ा रहे हैं व ब्यूरोक्रेट मनमाने ढंग से सरकार चला रहे है. जनता गहरी नींद में सोयी है, उसे जगाने की जरूरत है.
कहा कि यहां के लोग जिनके पूर्वज सैकड़ों वर्षो से यहां निवास करते आ रहे है, उन्हें स्थानीय प्रमाण पत्र बनाने के लिए 1932 का खतियान प्रस्तुत करना पड़ता है, जबकि बाहर से आकर 15-20 वर्षों से रह रहे लोगों को होल्डिंग टैक्स की रशीद दिखाने पर उन्हें स्थानीय प्रमाण पत्र मिल जाता है, यह कैसा न्याय है. विशिष्ट अतिथि पूर्व डीआइजी शीतल उरांव ने कहा कि झारखंड के कार्यपालकों का नकारात्मक रवैया झारखंड राज्य को गर्त में धकेलने का काम किया है. यहां के राजनेता की चुप्पी आश्चर्य का विषय है. कहा कि सरकारी नीतियों की कार्य व्यवस्था सही नहीं है. पूर्व विधान पार्षद प्रवीण कुमार सिंह ने कहा कि हम अपनी सभ्यता व संस्कृति की रक्षा करें. उन्होंने ब्रिटिश सांसद लार्ड मैकाले द्वारा ब्रिटिश संसद में 1835 में भारत के संबंध में दिये गये भाषण का उल्लेख करते हुए कहा कि लार्ड मैकाले ने कहा था कि यदि भारत में शासन करना है, तो वहां की संस्कृति को तोड़ना सबसे जरूरी है.
भारतीय संस्कृति को बचा कर रखना हमारी सबसे बड़ी चुनौती है. इसका एकमात्र समाधान जागरूकता है. भाजपा नेता ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि झारखंड राज्य की सबसे बड़ी चुनौती सरकार की अस्थिरता रही है. आज सरकारी योजनाओं की भरमार रहते हुए भी सुदूर ग्रामीण व पहाड़ी क्षेत्रों में रहनेवाले लोगों की स्थिति बद से बदतर है.
राजनेता सिर्फ अपनी जेब भरने में व्यस्त है, जबकि राज्य के प्रति प्रेम व समर्पण जरूरी है. कार्यक्रम को भाजपा जिलाध्यक्ष राजमोहन राम, मदन मोहन पांडेय, जिप सदस्य बृजमणि उरांव, सुनीता चितौड़ा, ऋतु कुमारी, सुमैया, सज्जाद खान ने भी संबोधित किया. संचालन मो सनाउल्लाह ने किया व धन्यवाद ज्ञापन प्रो शकुंतला भगत ने किया.
इस अवसर पर चैंबर ऑफ काॅमर्स के सचिव रितेश कुमार, गीता उरांव, शिरिश कुमार, विपिन बिहारी सिंह, एसके झा, रामचंद्र गिरी, रामविलास सिंह, फूलदेव उरांव, मो जाहिद परवेज, शमशाद आलम, राजेश साहू, राम कुमार सिंह, अरुण सिंह, लाल अवध शाहदेव, लाल नवल शाहदेव, पंकज गुप्ता, बाल मुकुंद लोहरा आदि मौजूद थे.
