संतोष कुमार की रिपोर्ट
लातेहारः पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) में पाये जाने वाले लंगूरों (हनुमान) के बीच प्रेम, करुणा और सामाजिक जुड़ाव की भावना बेहद गहरी होती है. ये जीव केवल भोजन और अस्तित्व के लिए साथ नहीं रहते, बल्कि इनके बीच इंसानों की तरह पारिवारिक स्नेह और भावनात्मक रिश्ता भी देखने को मिलता है. वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, लंगूरों का जीवन आपसी प्रेम तक ही सीमित नहीं है. उनकी शारीरिक क्षमता, सामाजिक नियम और दिमागी चतुराई भी विज्ञान की दुनिया को हैरान करती है. सामान्य बंदरों की तुलना में लंगूर शांत, गंभीर और अधिक अनुशासित जीव माने जाते हैं.
एलो-मदरिंग के साथ दिखती है इंसानों जैसी संवेदना
लंगूरों के समाज की सबसे खूबसूरत विशेषता यह है कि बच्चे की देखभाल केवल उसकी सगी मां ही नहीं करती. जब मां भोजन की तलाश में जाती है, तो झुंड की दूसरी मादाएं बच्चे को गोद में लेकर दुलारती और उसकी देखभाल करती हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, इस व्यवहार को एलो-मदरिंग कहा जाता है. लंगूरों में अपनों के प्रति सहानुभूति भी अद्भुत होती है. हाल ही में पीटीआर में एक साथी की सड़क दुर्घटना में मौत के बाद पूरा झुंड उसके आसपास इकट्ठा हो गया. इस दौरान लंगूर एक-दूसरे से लिपटकर मानो सांत्वना देते नजर आये. पूरे झुंड में वैसी ही शांति देखने को मिली, जैसी इंसानों के घर में किसी की मृत्यु के बाद शोक के दौरान होती है. साथी की मौत पर लंगूर उसके शरीर के पास काफी देर तक शांत खड़े रहते हैं. किसी साथी को मुसीबत में देखकर भी पूरा झुंड एकजुट हो जाता है और शिकारी का मुकाबला करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा देता है.
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ग्रूमिंग से मजबूत होता है आपसी विश्वास
लंगूर का नाम 'लांगुल' से माना जाता है, जिसका अर्थ लंबी पूंछ है. इनकी पूंछ पेड़ों पर संतुलन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. इसकी मदद से ये 10 से 15 फीट तक लंबी छलांग लगा सकते हैं. इनका चेहरा काला और शरीर स्लेटी रंग का होता है. सामान्य बंदरों की तुलना में लंगूरों का मुख्य भोजन हरी पत्तियां हैं. पत्तियों को पचाने के लिए इनके शरीर में गाय-भैंस की तरह जटिल पाचन तंत्र होता है, जिसमें विशेष बैक्टीरिया सेल्यूलोज को तोड़ने में मदद करते हैं. जंगल में इनकी औसत आयु करीब 18 से 30 वर्ष बतायी जाती है.
लंगूर अक्सर एक-दूसरे के बालों से जूं, गंदगी और मिट्टी साफ करते हैं. यह प्रक्रिया केवल सफाई तक सीमित नहीं होती, बल्कि आपसी प्रेम और विश्वास बढ़ाने का भी माध्यम है. जानकारों के अनुसार, इस प्रक्रिया को ग्रूमिंग कहा जाता है. इसके दौरान मस्तिष्क में एंडोर्फिन हार्मोन का स्राव होता है, जिससे उन्हें शांति और खुशी का अनुभव होता है. इनका स्नेह केवल अपनी प्रजाति तक सीमित नहीं है, बल्कि इंसानों के प्रति भी इनका व्यवहार काफी शांत और भरोसेमंद देखा जाता है.
सबसे शक्तिशाली नर होता है झुंड का लीडर
लंगूरों का सामाजिक जीवन कड़े नियमों से बंधा होता है. इनके झुंड में मादाओं की संख्या अधिक होती है और वे सामूहिक रूप से बच्चों की सुरक्षा करती हैं. झुंड का नेतृत्व आमतौर पर एक वयस्क और प्रभावशाली नर करता है. जब कोई युवा नर मौजूदा वर्चस्वशाली नर को चुनौती देकर लड़ाई में हरा देता है, तो वह झुंड का नया लीडर बन जाता है. इस तरह झुंड में नेतृत्व और सामाजिक व्यवस्था शक्ति तथा वर्चस्व के आधार पर तय होती है.
हिरण और लंगूर की बेमिसाल दोस्ती
पीटीआर के जंगलों में लंगूरों और चित्तीदार हिरण यानी चीतल के बीच भी आपसी सहयोग का अनूठा उदाहरण देखने को मिलता है. पेड़ों की ऊंचाई पर बैठे लंगूर दूर से किसी शिकारी को देखते ही खास तरह की अलार्म कॉल करते हैं. उनकी आवाज सुनकर जमीन पर चर रहे हिरण सतर्क हो जाते हैं और संभावित खतरे से बचने की कोशिश करते हैं. इसके बदले हिरण अपनी तेज सूंघने की क्षमता के जरिए जमीन पर छिपे खतरे का पता लगाकर लंगूरों को सतर्क कर सकते हैं. इतना ही नहीं, पेड़ों से लंगूरों द्वारा गिरायी गयी ताजी पत्तियां और फल भी हिरण बड़े चाव से खाते हैं. इस तरह जंगल में दोनों प्रजातियां एक-दूसरे के लिए खतरे की सूचना देने और भोजन हासिल करने में अप्रत्यक्ष रूप से मदद करती हैं.
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