गारू. प्रखंड के नक्सल प्रभावित सुरकुमी-हेसवा गांव आज भी सड़क और पुल की सुविधा से नहीं जुड़ सके हैं. बरसात के मौसम में कुड़ील नदी में तेज बहाव और बाढ़ के कारण सुरकुमी समेत आसपास के कई गांवों का प्रखंड मुख्यालय से संपर्क मुश्किल हो जाता है. सुरकुमी, हेसवा, नावाटोली, भंवरबंधा, बेसनाखाड़ और मौनाडोंडा गांवों की करीब ढाई हजार आबादी को हर साल बारिश के दौरान परेशानी का सामना करना पड़ता है.
पांच किमी की दूरी, लेकिन जाना पड़ता है 14 किमी
सुरकुमी-हेसवा गांव प्रखंड मुख्यालय से करीब पांच किमी दूर है. गांव तक पहुंचने वाले रास्ते में कुड़ील नदी पड़ती है. नदी पर पुल नहीं होने के कारण बारिश के दिनों में तेज जलप्रवाह के दौरान आवागमन बाधित हो जाता है. ऐसी स्थिति में ग्रामीणों को मारोमार होकर करीब 14 किमी की दूरी तय कर प्रखंड मुख्यालय पहुंचना पड़ता है.
पुल और सड़क के अभाव में गांव तक छोटे-बड़े वाहनों का आवागमन भी नहीं हो पाता है. ग्रामीणों को पैदल ही नदी और जंगल के रास्ते से गुजरना पड़ता है. गांव तक पहुंचने के क्रम में कुड़ील नदी के अलावा तीन जंगली नालों को भी पार करना पड़ता है.
छात्र और मरीज सबसे ज्यादा परेशान
ग्रामीणों के अनुसार बारिश के मौसम में स्कूली बच्चों के लिए स्कूल पहुंचना मुश्किल हो जाता है. वहीं वृद्धों और मरीजों को इलाज के लिए अस्पताल या प्रखंड मुख्यालय ले जाना भी चुनौतीपूर्ण रहता है. नदी में पानी बढ़ने के बाद ग्रामीणों के सामने आवागमन का संकट और गंभीर हो जाता है.
ग्रामीण पतवा सिंह, ग्राम प्रधान नरेश सिंह, अंतु कोरवा, विफन सिंह, सत्यनारायण सिंह, जगन्नाथ सिंह, बलकु सिंह, अजय सिंह, सोहन उरांव, बालेश्वर उरांव, लक्ष्मण सिंह, मानकी सिंह, बिनेशर सिंह, दिनेश सिंह, राजेंद्र सिंह, शिवचरण कोरवा, मंगल बृजिया, किशन सिंह और बिफन सिंह ने बताया कि पुल नहीं होने से ग्रामीणों को काफी परेशानी होती है. उनका कहना है कि बारिश में छात्रों का स्कूल जाना और मरीजों को अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो जाता है.
दो बार हुआ टेंडर, फिर भी नहीं बना पुल
ग्रामीणों के अनुसार सुरकुमी के कुड़ील नदी पर पुल निर्माण के लिए दो बार टेंडर हो चुका है. पहली बार वर्ष 2011-12 में पीएमजेएसवाई के तहत टेंडर हुआ था. इसके बाद वर्ष 2021-22 में पुल और सड़क निर्माण के लिए दोबारा टेंडर हुआ. हालांकि वन विभाग से एनओसी नहीं मिलने के कारण निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ सका.
सड़क का करीब ढाई किमी हिस्सा भी जंगल क्षेत्र में होने के कारण अब तक नहीं बन सका है. ग्रामीणों ने वर्ष 2018-19 में सुरकुमी गांव में आयोजित जनता दरबार में तत्कालीन उपायुक्त के समक्ष सड़क और पुल निर्माण की मांग रखी थी.
सांसद से भी लगायी थी गुहार
इस वर्ष पांच अप्रैल को गारू में हुई बैठक में ग्रामीणों ने चतरा सांसद कालीचरण सिंह के समक्ष भी कुड़ील नदी पर पुल निर्माण की मांग रखी थी. ग्रामीणों के अनुसार सांसद ने पुल निर्माण कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई पहल नहीं हो सकी है.
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क और पुल का निर्माण होने से सुरकुमी, हेसवा समेत आसपास के गांवों के लोगों को प्रखंड मुख्यालय, स्कूल और अस्पताल तक पहुंचने में बड़ी राहत मिलेगी.
