Jharkhand Naxal Surrender Policy: नक्सल आत्मसमर्पण नीति के तहत हिंसा का रास्ता छोड़ चुके पूर्व उग्रवादियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में झारखंड सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. गणतंत्र दिवस के अवसर पर सोमवार को लातेहार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान आत्मसमर्पण कर चुके 14 नक्सलियों के परिवारों को जमीन का पट्टा सौंपा गया. प्रशासन की ओर से इन परिवारों को चार-चार डिसमिल भूमि आवंटित की गई है, ताकि वे अपना आवास बनाकर सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन जी सकें.
लाभार्थी परिवारों में देखी गयी खुशी
जमीन का पट्टा मिलने पर लाभार्थी परिवारों में खुशी देखी गयी और उन्होंने सरकार और प्रशासन के प्रति आभार प्रकट किया. जमीन के साथ-साथ इन परिवारों को आत्मसमर्पण नीति के तहत अन्य सरकारी सुविधाएं भी उपलब्ध करायी गयी. इसमें आर्थिक सहायता के साथ बच्चों की शिक्षा से जुड़ी मदद भी शामिल है. इस मौके पर लाभार्थियों के परिवारों ने प्रभात खबर से बातचीत में कहा कि सरेंडर के बाद सरकार की ओर मिलने वाले सभी लाभ उन्हें मिल रहा है. जिससे नये जीवन की शुरुआत आसान हो रही है.
अभी कहां रह रहे हैं आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली ?
प्रशासन के अनुसार आत्मसमर्पण करने वाले कुछ पूर्व नक्सली फिलहाल हजारीबाग ओपन जेल में रह रहे हैं. इनमें खूंखार उग्रवादी आनंद सिंह खरवार भी शामिल हैं. उनके परिजनों ने बताया कि उन्होंने जेजेएमपी जैसे उग्रवादी संगठनों से अलग होकर फरवरी-मार्च के दौरान आत्मसमर्पण किया था.
किन वजहों से आत्मसमर्पण करने वाले साथी मुख्यधारा जुड़े ?
वहीं, आत्मसमर्पण करने वाले कई नक्सलियों और उग्रवादियों का कहना था कि पुलिस की सख्ती, परिवार का दबाव और सामान्य सामाजिक जीवन जीने की इच्छा ने उन्हें मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया. जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने अपराध का रास्ता क्यों चुना था तो इसके जवाब में अलग अलग लोगों ने अलग कारण बताए. कुछ का कहना था कि वे आपसी विवाद की वजह से इन संगठनों से जुड़े तो कोई गलतफहमी के कारण. लेकिन बाद में परिवार ने उन्हें समझाया और सरकार के सरेंडर पॉलिसी के बारे में जाना तो उन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़ने का संकल्प लिया.
पूर्व नक्सलियों और उग्रवादियों ने संगठन सक्रिय साथियों से क्या अपील की ?
पूर्व नक्सलियों और उग्रवादियों ने अब भी संगठन में सक्रिय अपने साथियों से हथियार छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने की अपील की है. उनका कहना है कि सरकार की पुनर्वास नीति से जीवन को नई दिशा मिल सकती है. जबकि प्रशासन का मानना है कि इस तरह की पहल से न केवल नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति स्थापित होगी, बल्कि समाज में पुनर्वास और विश्वास का माहौल भी मजबूत होगा.
