सुमित कुमार की रिपोर्ट
चंदवा (लातेहार): सरकारी योजनाओं के नाम पर राशि खर्च होने के बावजूद उसका अपेक्षित लाभ नहीं मिलने का मामला लातेहार जिले के चंदवा प्रखंड में सामने आया है. यहां एक भवन के निर्माण और मरम्मत पर अब तक करीब एक करोड़ रुपये खर्च किये जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद भवन अब तक उपयोग में नहीं आ सका है. मरम्मत के कुछ माह बाद ही भवन की बाहरी दीवारों की पुट्टी उखड़ने लगी है और कई जगह पाइप में लीकेज के कारण पानी बह रहा है. मामले को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है और सरकारी राशि के इस्तेमाल पर सवाल उठ रहे हैं.
करीब 20 साल पहले बना था आदिम जनजाति बालक छात्रावास
जानकारी के अनुसार, स्थानीय प्लस टू उच्च विद्यालय की भूमि पर स्कूल के समीप करीब 20 वर्ष पूर्व आदिम जनजाति बालक छात्रावास का निर्माण कराया गया था. निर्माण के बाद से ही भवन का उपयोग नहीं हो सका. बताया जाता है कि भवन को संबंधित विभाग को हैंडओवर तक नहीं किया गया. लंबे समय तक इस्तेमाल नहीं होने के कारण भवन जर्जर होता चला गया. भवन के सभी कमरों के खिड़की-दरवाजे टूट गये और परिसर असामाजिक तत्वों व नशेड़ियों का अड्डा बन गया. करीब चार माह पूर्व तत्कालीन उपायुक्त उत्कर्ष गुप्ता की पहल पर भवन के जीर्णोद्धार की कवायद शुरू की गयी. इसके लिए भवन मरम्मत, भवन सुंदरीकरण और चहारदीवारी निर्माण की तीन अलग-अलग योजनाएं तैयार की गयीं. इन योजनाओं पर डीएमएफटी फंड से जिला परिषद की पहल पर कुल करीब 75 लाख रुपये खर्च किये गए.
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मरम्मत के कुछ माह बाद ही दिखने लगीं खामियां
पुराने जर्जर भवन की मरम्मत, रंग-रोगन और सुंदरीकरण कर इसे नया रूप देने का प्रयास किया गया. हालांकि, काम पूरा होने के कुछ ही माह बाद भवन की बाहरी दीवारों की पुट्टी उखड़ने लगी है. कई पाइप में लीकेज के कारण पानी बह रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इन खामियों को दूर नहीं किया गया, तो बारिश के बाद भवन की स्थिति फिर खराब हो सकती है और दोबारा मरम्मत के नाम पर सरकारी राशि खर्च करनी पड़ सकती है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी भवन का उपयोग आखिर किस उद्देश्य से किया जा रहा है. जिस भवन को बच्चों के उपयोग के लिए बनाया गया था, वह वर्षों से बंद पड़ा है और अब मरम्मत के बाद भी उपयोग में नहीं आ सका है.
स्कूल ने डीसी से भवन उपयोग में देने की लगायी थी गुहार
प्लस टू उच्च विद्यालय के प्राचार्य विजय कुमार ने भवन की मरम्मत के बाद उपायुक्त को आवेदन देकर इसे स्कूल के उपयोग में देने की मांग की थी. प्राचार्य ने अपने आवेदन में कहा था कि भवन मूल रूप से स्कूल के बच्चों के लिए ही बनाया गया था. इसलिए इसका उपयोग बच्चों की पढ़ाई और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के लिए किया जाना चाहिए. बताया गया कि प्राचार्य के आवेदन पर उपायुक्त की ओर से अब तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है. ऐसे में एक ओर लाखों रुपये खर्च कर भवन की मरम्मत करायी गयी, वहीं दूसरी ओर उपयोग में नहीं आने के कारण भवन फिर से जर्जर होने की स्थिति में पहुंच रहा है. इससे सरकारी योजनाओं की उपयोगिता और खर्च की गयी राशि को लेकर सवाल उठने लगे हैं. ये भी पढ़ें- छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में संसद में प्रदर्शन, आदित्य साहू बोले- हेमंत सरकार से नाता तोड़ें राहुल गांधी
