बेतला से संतोष कुमार की रिपोर्ट
लातेहार. आज दुनिया भर में भारतीय संस्कृति और भाषा का गौरव लगातार बढ़ रहा है. हिंदी अब केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती आर्थिक और सांस्कृतिक ताकतों में से एक बन चुकी है. हालिया वैश्विक भाषाई आंकड़ों के अनुसार, हिंदी दुनिया की तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा बन गयी है.
यह केवल भारत की सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि फिजी, मॉरीशस, सूरीनाम, नेपाल और संयुक्त अरब अमीरात सहित दुनिया के 100 से अधिक देशों में प्रमुखता से बोली और समझी जाती है.
हिंदी दिवस के अवसर पर बेतला क्षेत्र के बरवाडीह शांति निकेतन विद्यालय के हिंदी के वरिष्ठ शिक्षक उमाशंकर उपाध्याय ने हिंदी की खूबियों को शेयर किया. उन्होंने कहा कि हिंदी अपने भीतर भारत की मिट्टी की खुशबू, संस्कार और आत्मीयता को समेटे हुए है. यह दिल को जोड़ने वाली भाषा होने के साथ-साथ आज आधुनिक ज्ञान-विज्ञान, रोजगार और तकनीक की भाषा भी बन चुकी है. यही कारण है कि आज का युवा हिंदी बोलने में हीनभावना नहीं, बल्कि गर्व महसूस करता है.
हिंदी की वैज्ञानिक संरचना: जैसी लिखी, वैसी बोली
हिंदी की सबसे बड़ी विशेषता इसकी वैज्ञानिकता है. यह दुनिया की उन चुनिंदा भाषाओं में से है, जो जैसी लिखी जाती है, ठीक वैसी ही बोली भी जाती है. जबकि कई ऐसी भाषाएं हैं जिन्हें लिखने और बोलने में काफी अंतर होता है.
अंग्रेजी से सीख: हिंदी में कोई साइलेंट लेटर नहीं
अंग्रेजी की तरह हिंदी में कोई भी अक्षर मूक (साइलेंट) नहीं होता. इससे शब्दों को पढ़ने और समझने में कोई दुविधा नहीं रहती.
स्पष्ट और अकाट्य उच्चारण
इसके प्रत्येक अक्षर की अपनी एक निश्चित और अपरिवर्तनीय ध्वनि होती है, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा नहीं होती. जो लिखा है, वही पढ़ा जाता है.
देवनागरी लिपि का अनूठा विज्ञान
हिंदी की लिपि देवनागरी है. इसके वर्णमाला का वर्गीकरण (क-वर्ग, च-वर्ग आदि) पूरी तरह से मानव मुख से निकलने वाली ध्वनियों के विज्ञान पर आधारित है, जो इसे दुनिया की सबसे सुव्यवस्थित लिपि बनाता है.
अथाह शब्द भंडार और समावेशी प्रकृति
हिंदी का शब्दकोश दुनिया के सबसे अमीर शब्दकोशों में से एक है. यह भाषा बेहद उदार और लचीली है, जो खुद को समय के साथ ढालना जानती है.
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संस्कृत की समृद्ध विरासत
हिंदी की जड़ें दुनिया की सबसे प्राचीन भाषा संस्कृत में हैं, जिससे इसे तत्सम शब्दों का समृद्ध खजाना मिला है. यही इसकी गहराई का मुख्य आधार है.
सदाबहार भाषाई लचीलापन
हिंदी ने समय के साथ अंग्रेजी, उर्दू, अरबी, फारसी और पुर्तगाली जैसी विदेशी भाषाओं के शब्दों को भी अपने भीतर इस कदर समाहित कर लिया है कि वे अब इसके अपने अंग लगते हैं.
डिजिटल क्रांति और बाजार की पहली पसंद
इंटरनेट के इस दौर में हिंदी ने तकनीकी जगत में अपनी एक नई और मजबूत पहचान बनाई है. वैश्विक बहुराष्ट्रीय कंपनियां अब भारत के ग्रामीण और शहरी बाजारों तक पहुंचने के लिए हिंदी को सबसे बड़ा जरिया मान रही हैं.
इंटरनेट पर सबसे तेज विकास
तकनीकी रिपोर्टों के अनुसार, इंटरनेट पर हिंदी कंटेंट (सामग्री) की मांग अंग्रेजी के मुकाबले कई गुना तेजी से बढ़ रही है, जिससे इस भाषा का डिजिटल दायरा बहुत बड़ा हो गया है.
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बहुराष्ट्रीय कंपनियों की मुख्य प्राथमिकता
गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, फेसबुक और अमेज़न जैसे वैश्विक दिग्गज अपने ऐप्स और सेवाओं को हिंदी में उपलब्ध करा रहे हैं ताकि वे देश के कोने-कोने तक पहुंच सकें.
ओटीटी और मनोरंजन उद्योग
सिनेमा के साथ-साथ नेटफ्लिक्स, प्राइम वीडियो जैसे प्लेटफॉर्म्स पर हिंदी वेब सीरीज और फिल्मों की लोकप्रियता वैश्विक स्तर पर करोड़ों डॉलर का बिजनेस कर रही है.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती धाक
आज हिंदी सात समंदर पार भी अपनी खुशबू बिखेर रही है. दुनिया के कोने-कोने में लोग इस भाषा को सीखने के लिए उत्सुक हैं.
विदेशी विश्वविद्यालयों में पढ़ाई
अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और रूस समेत दुनिया के 150 से अधिक प्रमुख विश्वविद्यालयों में हिंदी एक विषय के रूप में प्रमुखता से पढ़ाई जा रही है.
वैश्विक पहचान और मंच
विश्व हिंदी सचिवालय और हर साल आयोजित होने वाले विश्व हिंदी सम्मेलन इस बात के गवाह हैं कि यह भाषा अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और संस्कृति का एक मुख्य स्तंभ बन चुकी है.
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