बेतला,लातेहार: लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड के ग्रामीण इलाकों के सरकारी विद्यालयों में राष्ट्र की अस्मिता, गौरव और अखंडता का प्रतीक राष्ट्रगान 'जन गण मन' बच्चों को सही तरीके से नहीं आता है. प्रखंड की विभिन्न पंचायतों के दूरदराज क्षेत्रों में स्थित सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चों को न तो राष्ट्रगान गाने का सही तरीका मालूम है और न ही वे इसके कठिन शब्दों का शुद्ध उच्चारण कर पा रहे हैं. इससे शिक्षा विभाग के दावों पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
राष्ट्रगान में हो रही अशुद्धियां
विद्यालयों में जब बच्चों से सामूहिक या व्यक्तिगत रूप से राष्ट्रगान गाने को कहा गया, तो अधिकांश बच्चे कई महत्वपूर्ण चरणों में अटक गये. कई स्कूलों में बच्चे शब्दों को इस तरह तोड़-मरोड़कर बोल रहे थे कि राष्ट्रगान का मूल अर्थ ही बदल जा रहा था.
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मौके पर मौजूद शिक्षक भी इस गंभीर चूक को सुधारने के बजाय मूकदर्शक बने रह रहे हैं. वहीं, कई विद्यालयों में खेल के मैदान या प्रार्थना स्थल पर हर दिन नियम से प्रार्थना सभाएं आयोजित नहीं हो पा रही हैं. जहां होती भी हैं, वहां इसे केवल दैनिक औपचारिकता मानकर खानापूर्ति कर दी जाती है.
सुदूरवर्ती क्षेत्रों में स्थिति गंभीर
ग्रामीण क्षेत्रों, खासकर सुदूरवर्ती और आदिवासी बहुल प्रखंडों के गांवों में स्थिति और भी दयनीय है. इन क्षेत्रों में पहली पीढ़ी के शिक्षार्थी आते हैं, जिन्हें घर पर ऐसा माहौल नहीं मिलता. ऐसे में पूरी जिम्मेदारी स्कूल और शिक्षकों पर आ जाती है. लेकिन स्कूल अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं कर पा रहा है.
