झुमरीतिलैया: सरकारी स्कूलों में अब छात्राओं के लिए अलग शौचालय होगा. अभी भी अधिकतर स्कूलों में कामन शौचालय है. छात्राओं की सुरक्षा एवं स्वच्छता के मद्देनजर अब इसमें बदलाव किया जा रहा है. सर्वाेच्च न्यायालय (डा.जया ठाकुर बनाम भारत सरकार एवं अन्य) में दिए गए ऐतिहासिक निर्देशों के अंतर्गत कोडरमा समेत राज्य के सभी विद्यालयों में माहवारी स्वच्छता प्रबंधन (मेंस्ट्रुल हाइजीन मैनेजमेंट - एमएचएम) और बाल सुरक्षा व्यवस्था को कड़ाई से लागू करने का आदेश जारी किया गया है.
राज्य परियोजना निदेशक शशि रंजन ने राज्य के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों एवं जिला शिक्षा अधीक्षकों को पत्र जारी कर त्वरित अनुपालन का निर्देश दिया है. इसमें सबसे महत्वपूर्ण है कि शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के सभी विद्यालयों में छात्राओं के लिए पर्याप्त रोशनी, निजता यानी प्राइवेसी, फ्लश-पानी तथा साबुन-हैंडवाश की सुविधा से युक्त पृथक शौचालय का निर्माण व रखरखाव सुनिश्चित करना है.
कोडरमा में 605 प्राथमिक एवं मध्य विद्यालय, हाई स्कूल, 69 कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय 4 झारखंड बालिका आवासीय विद्यालय, तीन सीएम स्कूल आफ एक्सीलेंस संचालित हैं. यहां अध्ययनरत छात्राओं की संख्या 45 हजार से अधिक है.
आपात स्थिति में सहायता के लिए बनेंगे एमएचएम लैब कार्नर
विद्यालयों में माहवारी स्वच्छता एवं सुरक्षा के प्रति जागरूकता और आपात स्थिति में सहायता के लिए एमएचएम लैब कार्नर विकसित किया जाएगा. यहां सैनिटरी पैड एवं आवश्यक जानकारी उपलब्ध रहेगी. इस्तेमाल किए गए सैनिटरी नैपकिन के सुरक्षित एवं पर्यावरण-अनुकूल निस्तारण के लिए मैन्युअल इंसिनेरेटर की व्यवस्था अनिवार्य रूप से की जाएगी. इसके साथ ही छात्राओं से गोपनीय सुझाव व शिकायतें प्राप्त करने के लिए कंप्लेन बाक्स स्थापित किया जाएगा.
इसमें स्वच्छता, सुरक्षा एवं माहवारी संबंधी समस्याओं का त्वरित निवारण होगा. राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग का संचालित नि:शुल्क चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 विद्यालय के प्रमुख स्थानों पर स्पष्ट रूप से अंकित किया जाएगा।. यही नहीं दिव्यांग तथा विशेष आवश्यकता वाले छात्र-छात्राओं के लिए सुगम एवं बाधा-रहित शौचालय भी उपलब्ध कराए जाएंगे.
डीईओ-डीएसई करेंगे अनुश्रवण और निरीक्षण
जिला स्तर एवं प्रखंड स्तर पर अनुश्रवण समितियों का गठन कर निरीक्षण कैलेंडर तैयार किया जाएगा. वही डीईओ-डीएसई समय-समय पर विद्यालयों का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की जांच करेंगे तथा कमियों का तत्काल समाधान करेंगे. निरीक्षण के दौरान बाल अधिकार संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत तहत बाल सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर आवश्यक व सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी. सबसे महत्वपूर्ण है कि विद्यालयवार निरीक्षण की विस्तृत रिपोर्ट एवं अनुपालन विवरण राज्य परियोजना कार्यालय के माध्यम से सर्वाेच्च न्यायालय को प्रस्तुत किया जाएगा.
