झुमरीतिलैया, कोडरमा: स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के स्थानांतरण संबंधी स्पष्ट प्रावधान के बावजूद झुमरीतिलैया स्थित सीएच प्लस टू उवि में वर्ष 2019 से पति-पत्नी शिक्षकों की एक ही विद्यालय में पदस्थापना का मामला सामने आया है. विभागीय नीति में पति-पत्नी शिक्षकों को एक ही विद्यालय में पदस्थापित नहीं करने का प्रावधान है. इसके बावजूद दोनों शिक्षक वर्षों से इसी विद्यालय में पदस्थापित बताये जा रहे हैं. इससे शिक्षा विभाग की स्थानांतरण प्रक्रिया और नियमों के अनुपालन पर सवाल उठ रहे हैं.
जानकारी के अनुसार, नवीन चौधरी स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक (हिंदी) के पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनकी पत्नी राधिका स्नातकोत्तर प्रशिक्षित शिक्षिका (जीवविज्ञान) हैं. दोनों की पदस्थापना वर्ष 2019 से सीएच प्लस टू उवि में बतायी जा रही है.
2019 के संकल्प में स्पष्ट प्रावधान
जानकारों के अनुसार, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के संकल्प संख्या 2093, दिनांक छह अगस्त 2019 की कंडिका 6 (घ) में पति-पत्नी शिक्षकों की पदस्थापना को लेकर स्पष्ट प्रावधान है. इसमें कहा गया है कि पति-पत्नी दोनों शिक्षक होने पर उन्हें एक ही विद्यालय में पदस्थापित नहीं किया जायेगा. यथासंभव दोनों को एक ही प्रखंड में उनके संवर्ग के अनुरूप समीपवर्ती विद्यालयों में पदस्थापित किया जा सकता है. ऐसे में वर्ष 2019 से दोनों की एक ही विद्यालय में पदस्थापना को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
2022 में भी दोहराया गया था प्रावधान
विभागीय स्तर पर वर्ष 2022 में भी इस प्रावधान को स्पष्ट किया गया था. माध्यमिक शिक्षा निदेशालय की अधिसूचना संख्या 1556, दिनांक आठ जून 2022 के तहत स्थानांतरण नीति में संशोधन किया गया. इसकी कंडिका 10 में भी स्पष्ट किया गया कि एक जिले में पदस्थापित पति-पत्नी शिक्षकों को एक ही विद्यालय में पदस्थापित नहीं किया जायेगा. यथासंभव दोनों को एक ही प्रखंड में उनके संवर्ग के अनुरूप समीपवर्ती विद्यालयों में पदस्थापित किया जा सकता है. इसके बावजूद सीएच प्लस टू उवि में दोनों की एक साथ पदस्थापना जारी रहने से विभागीय नियमों के अनुपालन पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
क्या कहते हैं डीइओ
कोडरमा के डीइओ मुकुल कुमार राज ने कहा कि विभागीय आदेश को देखना होगा. वैसे एक विद्यालय में पति-पत्नी शिक्षकों की पदस्थापना मेरे अनुसार नहीं होनी चाहिए. हालांकि, एक प्रखंड में अथवा नजदीक के विद्यालय में पदस्थापित किया जा सकता है. पदस्थापन को लेकर स्थापना समिति की बैठक में निर्णय लिया गया होगा. यह पूर्व का मामला है, इसलिए पूरे मामले को देखना होगा.
