कोडरमा : जिले में सरकारी मशीनरी के पदाधिकारी नियम का पालन नहीं कर रहे हैं. कोई बिना सूचना के लंबे समय तक ड्यूटी से गायब रह रहा है, तो कई नियम विरुद्ध काम करने के बावजूद स्पष्टीकरण पूछे जाने पर इसका जवाब नहीं दे रहे है. ऐसे पदाधिकारियों व कर्मियों के विरुद्ध उपायुक्त संजीव कुमार बेसरा ने कार्रवाई की है. डीआरडीए के निदेशक अनुज कुमार प्रसाद, अवर निर्वाचन पदाधिकारी अरुण कुमार खलको व जिला कल्याण कार्यालय के लिपिक प्रमोद मुंडा के विरुद्ध डीसी ने प्रपत्र क गठित करते हुए राज्य सरकार को भेजा है. उनके विरुद्ध प्रपत्र क गठित करने के साथ ही संबंधित विभाग से उन्हें निलंबित करने की भी अनुशंसा की गयी है.
जानकारी के अनुसार इन पदाधिकारियों व कर्मियों पर बिना सूचना लंबे समय से गायब रहने, उच्च अधिकारी के आदेश का पालन नहीं करने व योजना के क्रियान्वयन में लापरवाही बरतने का आरोप है. अवर निर्वाचन पदाधिकारी पर, तो शराब पीकर ड्यूटी पर आने का गंभीर आरोप है. बताया जाता है कि अवर निर्वाचन पदाधिकारी अरुण कुमार खलको कई बार बिना सूचना कार्यालय के अनुपस्थित मिले. वर्ष 2015 से लेकर 2016 में कई मौकों पर इस तरह की बात सामने आयी. लंबे समय तक वे बिना सूचना के गायब रहें.
इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया, पर उन्होंने जवाब नहीं दिया. 31-8-16 को एक बार बिना सूचना कार्यालय से गायब रहने पर खोजा गया, तो वे जब डीसी कार्यालय पहुंचे, तो शराब के नशे में थे. जांच में शराब सेवन की पुष्टि हुई. डीआरडीए निदेशक सह जिला कल्याण पदाधिकारी अनुज कुमार प्रसाद पर बिना अवकाश स्वीकृत कराये मुख्यालय से बाहर जाने का आरोप है. आरोप है कि वे 4-4-17 को बिना अवकाश स्वीकृत कराये मुख्यालय से चले गये. बाद में अवकाश आवेदन देकर लंबी अवधि की छुट्टी ले ली. इसका कारण पूछा गया, पर जवाब नहीं दिया गया. एक बार जवाब आया, फिर लंबी छुट्टी ले ली गयी.
बार-बार बिना अवकाश स्वीकृत कराने के साथ ही रामनवमी के समय सतगावां में बतौर वरीय पदाधिकारी ड्यूटी लगाये जाने के बावजूद मौजूद नहीं रहने का भी आरोप अनुज कुमार प्रसाद पर है. इसके अलावा एससीएसटी व पिछड़ी जाति के क्रीड़ा छात्रवृत्ति के तहत मेसर्स महालक्ष्मी इंटरप्राइजेज झुमरीतिलैया से खेल सामग्री की खरीदारी ऊंचे दर पर व घटिया सामग्री की खरीद का आरोप इन पर हैं. इसका कारण पूछने पर जवाब नहीं दिया गया. यहीं नहीं कल्याण विभाग द्वारा साइकिल वितरण के लिए आयी छह करोड़, 20 लाख 68 हजार में से दो करोड़, 68 लाख, 38 हजार का व्यय हो पाया. उनकी लापरवाही से शेष राशि सरेंडर कर दी गयी. कुछ इस तरह का आरोप जिला कल्याण कार्यालय के लिपिक प्रमोद मुंडा पर है.
डीसी ने प्रमोद मुंडा के बिना सूचना अनुपस्थित रहने व विभिन्न आरोपों में इसके विरुद्व प्रपत्र क गठित किया है. डीसी ने अवर निर्वाचन पदाधिकारी के विरुद्व निर्वाचन विभाग व डीआरडीए निदेशक सह कल्याण पदाधिकारी के अलावा विभाग के लिपिक के विरुद्ध कल्याण सचिव को कार्रवाई की अनुशंसा भेजी है. डीसी की इस कार्रवाई से हड़कंप मचा है.
