शिक्षक नियुक्ति में व्यापक गड़बड़ी से लेकर टैंकर घोटाला में नपे पदाधिकारी से लेकर जनप्रतिनिधि
डीडीसी सूर्य प्रकाश की अनुशंसा पर ही जिला बोर्ड के प्रधान सहायक तक पर हुई थी कार्रवाई
डीडीसी के पदभार ग्रहण करने के दो-तीन माह में ही िशक्षक िनयुक्ति की गड़बड़ी का मामला सामने आया
अनियमिततता करने पर कई रोजगार सेवकों व अन्य पर इन्हीं की अनुशंसा पर गिरी है गाज
पंचायतों में मुखिया की ओर से पानी टैंकर खरीद में व्यापक गड़बड़ी का मामला सामने आया
विधायक मद से 74 योजना ली गयी थी. िजसमें वर्तमान स्थिति है कि 51 पूर्ण है और 23 अपूर्ण है
विकास
कोडरमा : घोटा के लिए हमेशा सुर्खियां बंटोरनेवाला कोडरमा जिला इन दिनों एक बार फिर चर्चा में है. हालांकि, इस बार चर्चा शिक्षा मंत्री व डीडीसी के बीच हुए व्यवहार के बाद शुरू हुई है, लेकिन इसका अंजाम क्या होगा यह भविष्य के गर्त में है. पूरे मामले को लेकर चर्चा में आये डीडीसी सूर्य प्रकाश कोडरमा में अपना कार्यभार संभालने के बाद से ही लगातार चर्चा में रहे हैं. यह इत्तफाक रहा है कि जिले में हुई व्यापक गड़बड़ीवाले मामलों की जांच इन्हीं को मिली. हर मामले में जांच के बाद गड़बड़ी भी सामने आयी.
यही कारण रहा है कि डीडीसी हमेशा सुर्खियों में रहे. मामला चाहे शिक्षा विभाग की ओर से जिले में की गयी शिक्षक नियुक्ति में गड़बड़ी का हो या फिर गांव की सरकार द्वारा टैंकर खरीद में की गयी गड़बड़ी का. सभी बड़े मामलों की जांच डीडीसी की अध्यक्षतावाली समिति ने की और गड़बड़ी पकड़ी. डीडीसी अपनी अलग कार्यशैली के कारण भी चर्चा में रहे हैं. विधायक मद की योजनाओं व उनकी स्थिति को लेकर लगातार की जा रही मॉनिटरिंग की बात करें या फिर अनियमितता व लापरवाही बरतने पर रोजगार सेवकों से लेकर जेइ को बरखास्त करने का मामला हो, सभी में एक के बाद एक कार्रवाई होती चली गयी.
जिला परिषद में पूर्व में भी हुई गड़बड़ी इन्हीं द्वारा करायी गयी जांच के बाद सामने आयी. इनकी अनुशंसा पर ही जिला बोर्ड के प्रधान सहायक तक पर कार्रवाई हुई.
विधायक मद की योजना को लेकर मॉनिटरिंग व फेरबदल से तल्खी : वर्ष 2015-16 में विधायक मद से 74 योजना ली गयी थी. वर्तमान स्थिति यह है कि इनमें से 51 पूर्ण है और 23 अपूर्ण है. पहले के वर्षों में डीसी विपत्र जमा करने को लेकर बरती गयी लापरवाही के कारण कोडरमा की स्थिति खराब थी. ऐसे में प्राधिकृत पदाधिकारी डीडीसी इसकी लगातार मॉनिटरिंग करते रहे. बताया जाता है कि विधायक मद की योजना का काम पहले विशेष प्रमंडल से कराया जा रहा था.
ऐसे में वित्तीय वर्ष में अनुशंसित दो करोड़ की राशि में से नियमत: 65 फीसदी राशि करीब एक करोड़ 30 लाख विशेष प्रमंडल को डीआरडीए की ओर से जारी कर दी गयी. बाद में नियम में फेरबदल हुआ और विशेष प्रमंडल को खाते में राशि रखने पर रोक लग गयी.
डीआरडीए से विशेष प्रमंडल को कहा गया कि बची राशि वापस कर दी जाये, लेकिन विभागीय इइ ने बचे 44 लाख डीआरडीए को सीधे वापस नहीं कर कोषागार में जमा कर दिया. परेशानी बढ़ी, तो डीसी के हस्तक्षेप से पैसा डीआरडीए को वापस मिला. इसके बाद योजना मद की राशि के भुगतान व कार्य कराने के लिए नोडल एजेंसी एनआरइपी का चयन किया गया. एनआरइपी को पहले 44 लाख व बाद में 55 लाख रुपये आवंटित कर दिये गये.
जानकारी के अनुसार, रुपये आवंटित होने के बाद एनआरइपी ने स्पष्ट कर दिया कि बिना योजना के भौतिक सत्यापन किये भुगतान नहीं किया जायेगा. दबाव बढ़ा तो 75 प्रतिशत राशि भुगतान करने व सत्यापन के बाद ही 25 प्रतिशत देने की बात कही गयी. इस नये फेरबदल व कड़े नियम के बाद से तल्खी और बढ़ गयी. अब जब विवाद बढ़ गया है, तो डीडीसी ने एक रिपोर्ट भी सरकार को बना कर भेजी है कि विधायक मद की योजना को पूर्ण कराने व डीसी विपत्र के लिए कितनी बार बैठक की और कैसे मॉनिटरिंग की गयी. रिपोर्ट में कहा गया है कि विधायक मद की योजना को पूर्ण करने व उसका डीसी विपत्र समर्पित करने को लेकर 12 बैठक विभिन्न समय पर की गयी. विधायक फंड की अग्रिम निकासी के समायोजन को लेकर व डीसी विपत्र समर्पित करने को लेकर कार्य एजेंसियों के साथ सात बैठक की गयी.
डीडीसी ने कोडरमा में 29 दिसंबर 2015 को पदभार ग्रहण किया था. एक-दो माह बाद ही जिले में शिक्षक नियुक्ति की गड़बड़ी का मामला सामने आया. प्रभात खबर ने जैसे तैसे हुई नियुक्ति की पोल खोली, तो डीसी ने डीडीसी सूर्य प्रकाश की अध्यक्षता में जांच समिति बना दी.
मार्च माह में मामला सामने आया, लेकिन इस मामले की जांच थोड़ी लंबी चली. हालांकि, गड़बड़ी पूरी तरह सामने आ गयी. डीडीसी की अध्यक्षतावाली समिति ने गड़बड़ी की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए डीसी को रिपोर्ट सौंपी. इस पर डीसी ने गड़बड़ी के लिए जिम्मेवार कौन है, इसकी जांच को लेकर दोबारा डीडीसी की अध्यक्षता में समिति बना दी.
जांच में डीडीसी ने पूरी तरह से इसके लिए तत्कालीन डीएसइ पीवी शाही, शिक्षा विभाग के प्रधान सहायक अजीत कुमार, धर्मेंद्र कुमार सिंह व अन्य को जिम्मेवार ठहराया. डीडीसी की रिपोर्ट के आधार पर ही बाद में दोनों कर्मी सस्पेंड हुए. 15 नवनियुक्त अभ्यर्थियों की नियुक्तियां रद्द हो गयी. डीएसइ का कोडरमा से तबादला हुआ, गड़बड़ी को लेकर जिम्मेवार डीएसइ दूसरे जिले में कार्य करते रहे, लेकिन फाइल में जिक्र बातों के आधार पर बाद में शिक्षा विभाग को डीएसइ को निलंबित करना ही पड़ा.
टैंकर खरीद में गड़बड़ी, 92 मुखिया पर लटक रही तलवार
जिले की प्रत्येक पंचायतों में मुखिया की ओर से पानी टैंकर खरीद में व्यापक गड़बड़ी का मामला दिशा की बैठक में उठाया गया. सांसद डॉ रवींद्र राय ने पूरे मामले के जांच के आदेश दिये. जांच डीडीसी की अध्यक्षतावाली समिति को मिली. जांच के दौरान मुखिया, टैंकर आपूर्ति करनेवाली एजेंसी व अन्य से जानकारी लेने के बाद सामने आया कि खरीद में व्यापक गड़बड़ी की गयी है. एक लाख तक में टैकर की खरीद हो जाती, लेकिन अधिकतर मुखिया ने एक लाख 70 हजार से एक लाख 80 हजार तक का बिल देकर भुगतान ले लिया. जांच में हर टैंकर की खरीद पर करीब 70 से 80 हजार ज्यादा की राशि भुगतान का मामला सामने आया. सांसद ने समीक्षा के दौरान बीस दिन के अंदर उक्त राशि मुखिया से वापस जमा कराने या फिर कार्रवाई करने का आदेश दे दिया. अब गड़बड़ी करनेवाले इन 92 पंचायतों के मुखिया पर तलवार लटक रही है. मुखिया को अधिक ली गयी राशि का भुगतान करने को कहा जा रहा है. ऐसा नहीं करने पर मामला दर्ज कराने की तैयारी भी है.
विवेका चौधरी मामले में जांच के बाद लीपापोती
करोड़ों रुपये के घोटाले व भ्रष्टाचार के मामले में पूर्व में जेल जा चुके जूनियर इंजीनियर विवेका चौधरी के विभिन्न मामलों की एक बार फिर डीडीसी ने समीक्षा करायी. प्रशासनिक आदेश पर मामलों की जांच के दौरान लाखों रुपये रिकवरी करने और एफआइआर कराने की बात सामने आयी. हालांकि, इस मामले में संबंधित एजेंसी विशेष प्रमंडल के इइ सलील किशोर दुबे पर सवाल उठ गये. इइ ने पहले रिपोर्ट दी कि 15 लाख रिकवरी करनी है. फिर बताया कि 44 लाख रिकवरी करनी है. बाद में मामले को लेकर एफआइआर तो की गयी, पर उसमें कई त्रुटियां सामने आयी. इस मामले को लेकर भी डीडीसी ने लगातार सवाल उठाये और इइ चुप्पी साध गये. इधर, एक मामला जिला परिषद में पूर्व के वर्षों में बरती गयी भारी अनियमितता का भी सामने आया. इसकी पूरी जांच अभी जारी है. डीडीसी की अनुशंसा पर अॉडिट टीम ने जांच की, तो पाया कि मनमाने तरीके से पूर्व के डीडीसी के हस्ताक्षर के केस बुक से काम किया गया है. यही नहीं, राशि पर मिले ब्याज की इंट्री नहीं है. अन्य कई मामले में गड़बड़ी प्रारंभिक तौर पर सामने आयी, तो डीडीसी ने प्रधान सहायक विजय कुमार वर्मा पर प्रपत्र कर गठित करने की अनुंशसा की.
सरकारी कर्मियों पर खूब गिरी है गाज
डीडीसी के इस कार्यकाल के दौरान अनियमितता व लापरवाही बरतनेवाले सरकारीकर्मियों पर भी खूब कार्रवाई हुई. बीडीओ कोडरमा द्वारा 6 जून 2016 के पत्रांक 530 में झुमरी पंचायत में मनरेगा के तहत डोभा निर्माण में जेसीबी के प्रयोग की बात सामने आयी. इस मामले में रोजगार सेवक गौरव कुमार व पंचायत सेवक बद्री रजवार पर कार्रवाई की अनुशंसा की गयी.
स्पष्टीकरण मांगा गया. संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर 16 जून 2016 को सेवा मुक्त करने की कार्रवाई हुई. इस मामले में संबंधित रोजगार सेवक को वापस सेवा बहाली को लेकर दबाव है. इसके विपरीत सरकार के संयुक्त सचिव ग्रामीण विकास विभाग का स्पष्ट निर्देश है कि मनरेगा के तहत बहाल जिस कर्मी को एक बार सेवा मुक्त कर दिया गया, उसे दुबारा बहाल नहीं किया जा सकता. इसके अलावा डीडीसी ने विभिन्न आरोपों में ग्राम रोजगार सेवक विनोद कुमार, विश्वनाथ सोनी, अमृता श्रीवास्तव, सूर्यदेव कुमार यादव को सेवा मुक्त कर दिया. आरोप सामने आने पर कंप्यूटर सहायक अभिषेक कुमार गौरव, लेखा सहायक अमित कुमरी, प्रवीण कुमार, जूनियर इंजीनियर चंदन कुमार को बरखास्त कर दिया गया.
