मुनि श्री पुण्यानंद जी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि जैन धर्म का मूल सिद्धांत जियो और जीने दो है, जिसके अंतर्गत जीव रक्षा और जीवन दान को सर्वोपरि माना जाता है. इसी भावना से गौशाला में पशुओं को आहार दिया गया. मुनि श्री शुभानंद जी मुनिराज ने अपने प्रवचन में सुखी जीवन के तीन उपाय बताये. उन्होंने कहा कि लोभ पाप का बाप है, जो मनुष्य को गलत कार्यों की ओर ले जाता है. सुखी रहने के लिए स्वस्थ रहना आवश्यक है और इसके लिए भोजन का सही चयन, समय और तरीका जानना जरूरी है. मोह और अपेक्षाएं दुख का कारण बनती हैं, इसलिए उनसे बचना चाहिए.
समाज की महिलाओं ने अपने हाथों से गायों को हरा चारा, गुड़, तरबूज और रोटी खिलाकर सेवा का भाव प्रकट किया. इस दौरान जैन समाज मीडिया प्रभारी राज कुमार जैन अजमेरा, नवीन जैन सहित अनेक लोग उपस्थित रहे.जैन समाज ने गौशाला में किया पशु आहार का वितरण
जैन समाज ने गौशाला में किया पशु आहार का वितरण
