जल्द प्रकाशित होगी नयी अधिसूचना, अन्य जगहों पर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज
बंगाल के दानकुनी से पंजाब के लुधियाना तक 1856 किलोमीटर बनना है माल ढुलाई के लिए कॉरीडोर
विकास
कोडरमा : केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना इस्टर्न डेडीकेटेड फ्रेट कॉरीडोर को लेकर जहां भूमि अधिग्रहण व अन्य काम तेजी से चल रहे हैं, वहीं इस परियोजना के रूट एलाइनमेंट में आंशिक फेरबदल किये जाने की जानकारी मिल रही है. झुमरीतिलैया के लोगों के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए फ्रेट कॉरीडोर के निर्माण रूट में आंशिक फेरबदल की गयी है.
इस फेरबदल से पूर्व में अधिग्रहण की जद में आनेवाले कई आवासीय मकान व व्यावसायिक दुकानें टूटने से बचेंगी, तो कई को आंशिक नुकसान होगा. यहीं नहीं परियोजना के काम को गति देने के लिए युद्ध स्तर पर काम चल रहा है. हालांकि नयी जानकारी यह भी सामने आयी है कि परियोजना कार्य के दौरान आम लोगों की मुश्किलें कुछ दिन के लिए बढ़ सकती है. शहर में शान के रूप में खड़ा हुआ रेलवे का ओवरब्रिज इस परियोजना कार्य के दौरान टूट जायेगा.
जानकारी के अनुसार आम लोगों को राहत प्रदान करने के लिए रेलवे फाटक पर लगनेवाले जाम को देखते हुए आरओबी निर्माण को मंजूरी दी गयी थी. करीब तीन साल पूर्व आरओबी निर्माण के बाद इसका उदघाटन किया गया, तो लोगों ने अक्सर लगनेवाले जाम से राहत की सांस ली.
अब एक बार फिर केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए ओवरब्रिज का टूटना तय है. हालांकि, रेलवे इसके तुरंत बाद नया ओवरब्रिज तैयार करेगा, इसकी भी तैयारी है. इस परियोजना से जुड़े पदाधिकारी भी इस बात की पुष्टि कर रहे हैं.
उनके अनुसार रेलवे की महत्वपूर्ण परियोजना को पूरा करने के लिए ओवरब्रिज को थोड़ा तोड़ना पड़ेगा. परियोजना कार्य के दौरान नया ओवरब्रिज का निर्माण होगा. अधिकारी की मानें तो तिलैया शहरी क्षेत्र के लोगों की मांग को देखते हुए थोड़ा फेरबदल किया गया है. ज्ञात हो कि पश्चिम बंगाल के हल्दिया स्थित दानकुनी से पंजाब के लुधियाना तक कुल 1856 किलोमीटर तक रेलवे के इस्टर्न डेडीकेटेड फ्रेट काॅरीडोर का निर्माण होना है. दो लाइन रेलवे ट्रैक पर सिर्फ मालवाहक वाहनों का परिचालन होगा. इससे माल ढुलाई में आसानी होगी.
कई जगह बना बाइपास, लोग कर रहे हैं विरोध
परियोजना को लेकर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को लेकर चिह्नित करने का काम शुरू होने पर तिलैया के प्रभावित लोग विरोध में आ गये थे. लोगों का कहना था कि इस परियोजना के तहत कई जगह लोगों की मांग पर बाइपास बनाया गया है. इसमें इलाहाबाद ईस्ट (26 किमी), इलाहाबाद वेस्ट (59 किमी), कानपुर (58 किमी), चंदौली, मिर्जापुर, गया बाइपास शामिल हैं. यहीं नहीं धनबाद के पास रेलवे स्टेडियम को बचाया गया.
लोगों का कहना था कि गया से कॉरीडोर के लिए जो लाइन दाहिने तरफ से आ रही है, उसे विशुनपुर होते हुए धनबाद की ओर से बढ़ना था, उसे अनायास ही बदल कर बायें तरफ तिलैया शहर में प्रवेश कर दिया गया है. इससे सैकड़ों आवासीय मकान व व्यावसायिक दुकानें प्रभावित होंगी और ये टूटने से लोगों के समक्ष संकट उत्पन्न हो जायेगा. स्थानीय लोगों का कहना था कि रेलवे ने सबसे पहले पांच जुलाई 2014 को अधिसूचना जारी की थी.
इसमें तिलैया शहरी क्षेत्र, मोरियावां शहरी क्षेत्र, घरौंजा के इलाके प्रभावित हो रहे थे. लोगों के विरोध प्रदर्शन के बाद रेलवे ने 25 मई 2015 को पुन: अधिसूचना जारी की इसमें विशुनपुर, गुमो, चौराही, घुट्टीटांड़, पिपराडीह, महुआदोहर ग्रामीण इलाका से रूट निकालने की बात कही गयी. बाद में रेलवे ने पांच सितंबर 2015 को पुन: 2014 वाली अधिसूचना को जारी कर दी. इसका लोग विरोध कर पूरा रूट परिवर्तन करने की मांग कर रहे हैं. इस बीच रूट में आंशिक फेरबदल की जानकारी सामने आयी है. हालांकि, लोग इसे स्वीकार करेंगे या विरोध जारी रहेगा यह आनेवाला समय बतायेगा.
तिलैया शहरी क्षेत्र के लोगों की मांग पर रेलवे लाइन परियोजना में कुछ फेरबदल हुई है. एलाइनमेंट में बदलाव हुआ है, रोड सर्विस कम कर दी गयी है. पहले से करीब 50 फीसदी क्षेत्र कम प्रभावित होने की उम्मीद इससे है. हम परियोजना कार्य को पूरी तरह गति देने में लगे हैं. कार्य के दौरान ओवरब्रिज भी टूटेगा. हालांकि इस पर तुरंत काम भी कर लिया जायेगा. जहां तक भूमि अधिग्रहण की बात है, वर्तमान में 29 में से 14 गांव के लोगों को करीब 18 करोड़ रुपये मुआवजा का भुगतान की प्रक्रिया जारी है. इसमें से 3.37 करोड़ रुपये मुआवजा का भुगतान हो चुका है.
बालेश्वर सिंह, उप परियोजना प्रबंधक, डीएफसीसीआइ
