नहीं खुल रहे ग्रामीण क्षेत्र के एटीएम, दो हजार का नोट बना सिरदर्द
जयनगर : केंद्र सरकार द्वारा पांच व एक हजार के नोट बंद करने की घोषणा और इसे बदलने का समय निर्धारित करने तथा बैंकों व एटीएम की व्यवस्था का ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक असर देखा जा रहा है. किसान, गृहिणी व आम लोग बैंकों का चक्कर काट रहे है. जहां काम तो बढ़ा है, पर काउंटर व कर्मी नहीं बढ़े है. बैंकिंग व्यवस्था से धनकटनी समेत कई कार्य प्रभावित हुए है. महिलाओं की तो दिनचर्या ही बदल गयी है. स्थिति यह है कि लोग अहले सुबह उठकर राम का लेने के बजाय बैंक का नाम ले रहे हैं. इस फैसले व परेशानी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए डुमरडीहा निवासी किसान रामू यादव ने कहा कि बड़े नोट बंद है और छोटे नोट मिल नहीं रहे है. इससे रोजमर्रा की खरीदारी प्रभावित हो गयी है. बैंकों की स्थिति यह है कि कई बार तो घंटों लाइन में लगने के बाद बैंक में प्रवेश करते है, तो पता चलता है कि बैंक में कैश ही नहीं है. एटीएम जाते है तो एटीएम का बंद दरवाजा मुंह चिढ़ाता है.
डुमरडीहा के युवा व्यवसायी चिंतामणि यादव ने कहा कि भले ही केंद्र सरकार के इस फैसले से देश की अर्थव्यवस्था आगे चल कर मजबूत होगी. मगर फिलहाल अर्थव्यवस्था चौपट हो गयी है. उन्होंने पीएम के फैसले को जायज बताते हुए कहा कि बड़े नोटों को बंद करने के साथ छोटे नोट उपलब्ध हो जाते, तो आपाधापी नहीं होती. फोरलेन रोड के किराना दुकानदार रंजीत कुमार ने कहा कि एक तो बड़े नोट बंद कर दिये गये, छोटे नोट मिलते ही नहीं, मिलता भी है तो दो हजार का नोट फिर उसका खुदरा नहीं मिलता और लोग छोटे छोटे सामानों की खरीदारी के लिए नोट भटकते रहते है. इससे दुकानदारी भी प्रभावित हो गयी है. फोरलेन स्थित कमला फर्नीचर के संचालक करियावां निवासी किशुन राणा ने कहा कि बड़े नोटों को बंद करने का फैसला सही है, इससे छिपा हुआ कालाधन वापस आयेगा. लोगों को जो परेशानी है वह भी समाप्त होगी. मगर शादी विवाह के लगन में व्यवसायी प्रभावित हो गयी है.
हरली निवासी शंकर यादव ने कहा कि पीएम का फैसला सही है, इससे काला बाजारी व भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा. चरकी पहरी निवासी चाय समोसा विक्रेता कैलाश यादव ने कहा कि सरकार का फैसला सही है, इससे कालाबाजारियों के पास छिपा कालाधन वापस आयेगा. मगर सरकार को पैसा निकासी की राशि बढ़ानी चाहिए. खुदरा के अभाव में दुकानदारी प्रभावित होती है और उधारी ज्यादा लग रहा है. थोक विक्रेता से नकद सामान लाकर ग्राहकों से उधार बेचना पड़ रहा है. पहले जो एक हजार व पांच सौ का नोट लेकर आते थे, अब वो दो हजार का नोट दिखा कर कहते है कि लिख लेना खुदरा नहीं है. ऐसे में दो हजार का नोट ग्रामीण क्षेत्र में सिरदर्द बनकर रह गया है.
महिलाओं के लिए खास पर सुविधाएं आम
महिलाओं के लिए मंगलवार को बैंक में खास दिन रखा गया है, पर सुविधाएं आम ही रही.घंटो उन्हें कतार में खड़ा रहना पड़ा. पहले मैं-पहले मैं की आपाधापी लगी रही. बीओआइ हिरोडीह में पहले तो महिलाओं को घंटो कतार में खड़ा रहना पड़ा, फिर घंटो टोकन लेकर इंतजार करना पड़ा. दोपहर बाद उन्हें पता चला की बैंक में कैश नहीं है. उल्लेखनीय है हिरोडीह बीओआइ में शनिवार से ही राशि का अभाव है. वहीं बगल का एटीएम भी बंद है.
कंद्रपडीह निवासी रेखा देवी ने बताया कि वह पांच बजे सुबह से लाइन में है. 10.30 बजे उसे व अन्य महिलाओं को टोकन मिला और दोपहर 1.30 बजे पता चला की बैंक में कैश ही नहीं है. कंद्रपडीह निवासी सरिता देवी व अंजु देवी ने बताया कि राशि निकासी के लिए वे लोग कई दिनों से परेशान है. बैंक का चक्कर में घर का काम व खेती प्रभावित हो रही है. सरकार ने बड़े नोटों को बंद तो कर दिया, पर बैंकों में सुविधाएं नहीं बढ़ायी. पर्याप्त राशि भी उपलब्ध नहीं करायी. कहने को आज महिलाओं के लिए खास दिन है पर व्यवस्था आमदिनों वाली ही है.
