पुल की मरम्मत में 2 माह की देरी पर ग्रामीणों का अनूठा प्रदर्शन, केक काटकर जताया विरोध

Unique Portest in Khunti: खूंटी जिले में खूंटी और सिमडेगा को जोड़ने वाला एकमात्र पुल 2 महीने पहले ध्वस्त हो गया. ग्रामीण इसकी मरम्मत की मांग कर रहे हैं. 2 महीने बीत जाने के बाद भी जब इसकी मरम्मत का काम शुरू नहीं हुआ, तो उन्होंने सड़क जाम करने, बीडीओ या उपायुक्त का घेराव करने की बजाय एक अनोखे तरीके से प्रदर्शन किया. इन्होंने प्रशासन से मांग की कि उनके बच्चों की जान और शिक्षा दोनों खतरे में है. जल्द से जल्द पुल की मरम्मत करवायी जाये.

Unique Portest in Khunti: झारखंड की राजधानी रांची से 50 किलोमीटर दूर स्थित खूंटी जिले में पुल की मरम्मत में 2 महीने की देरी के विरोध में ग्रामीणों ने केक काटा. खूंटी के मुरहू प्रखंड स्थित पेलोल गांव के 30 से अधिक ग्रामीणों ने एक पुल की मरम्मत में देरी का अनूठे तरीके से विरोध जताया. उन्होंने पुल टूटने के 2 महीने पूरे होने के प्रतीक के तौर पर मंगलवार 19 अगस्त को 2 पाउंड का केक काटा.

रांची से 50 किमी दूर बनई नदी पर बना पुल जून में ढहा

यह पुल बनई नदी पर है, जो खूंटी-तोरपा-कोलेबिरा सड़क पर राज्य की राजधानी रांची से करीब 50 किलोमीटर दूर है. मानसून के दौरान भारी बारिश के कारण 19 जून को यह पुल ढह गया था. पुल की मरम्मत में प्रगति नहीं होने से नाराज ग्रामीणों ने यह सांकेतिक विरोध जताया.

पुल टूटने से स्कूली बच्चों को हो रही भारी परेशानी

उनका कहना है कि पुल के टूटने से उन्हें, विशेषकर स्कूल जाने वाले बच्चों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. मुरहू प्रखंड के सामाजिक कार्यकर्ता बा सिंह हासा ने कहा, ‘दो महीने बीत चुके हैं, लेकिन न तो मरम्मत कार्य शुरू हुआ है, न ही कोई अस्थायी वैकल्पिक मार्ग बनाया गया है.’

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प्रशासन की कार्रवाई से बचने के लिए अपनाया विरोध का अनूठा तरीका – ग्राम प्रधान

पेलोल ग्राम प्रधान शंकर तिर्की ने बताया कि प्रशासन की कार्रवाई से बचने के लिए ग्रामीणों ने शांतिपूर्ण और सांकेतिक विरोध करने का रास्ता चुना. उन्होंने कहा, ‘हमने परंपरागत सड़क जाम करने की बजाय एक रचनात्मक और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना बेहतर समझा.’

25 फुट ऊंची बांस की सीढ़ी चढ़कर स्कूल जाते बच्चों का Video हुआ था Viral

यह मुद्दा जून में सुर्खियों में आया था, जब एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसमें स्कूली बच्चे 25 फुट ऊंची बांस की सीढ़ी चढ़कर स्कूल जाते दिखे थे. इसके बाद प्रशासन ने हस्तक्षेप करते हुए शीघ्र वैकल्पिक व्यवस्था का आश्वासन दिया था. ग्रामीणों ने बताया कि अब तक कोई ठोस कार्य नहीं हुआ है.

बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा दोनों खतरे में – शंकर तिर्की

ग्राम प्रधान तिर्की ने कहा, ‘सरकार की ओर से इस अहम बुनियादी ढांचे को बहाल नहीं करने से हमारे बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा दोनों खतरे में पड़ गयी है.’ उन्होंने यह भी बताया कि यह पुल खूंटी और सिमडेगा जिलों को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है. वर्तमान में कोई वैकल्पिक रास्ता मौजूद नहीं है.

विधायक और नेताओं के दौरे के बाद भी नहीं बना पुल

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि स्थानीय विधायक राम सूर्या मुंडा (झामुमो) समेत कई राजनीतिक द्वारा दौरा करने और पुल निर्माण का शिलान्यास करने के बावजूद कार्य प्रारंभ नहीं हुआ है. खूंटी की उपायुक्त आर रोनिता से संपर्क के प्रयास किये गये, लेकिन संपर्क नहीं हो सका. खूंटी के उप विकास आयुक्त (डीडीसी) आलोक कुमार दुबे ने कहा कि निर्माण कार्य मानसून के बाद शुरू होगा.

डीडीसी बोले – मानसून के बाद होगा पुल का निर्माण

उन्होंने कहा, ‘बारिश के दौरान निर्माण कार्य कर पाना संभव नहीं है. पुल के गिरने के बाद तकनीकी रिपोर्ट त्वरित रूप से पथ निर्माण विभाग को भेज दी गयी थी. हमें विश्वास है कि आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त हो गयीं हैं. कार्य मानसून के बाद प्रारंभ होगा. हम ग्रामीणों की समस्याओं के प्रति पूरी तरह संवेदनशील हैं.’

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By Mithilesh Jha

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