कोयला ढुलाई व उत्पादन ठप

खलारी : प्रबंधन की उपेक्षा से नाराज तथा विभिन्न मांगों को लेकर विस्थापित रैयतों ने झारखंड विस्थापित प्रभावित संघर्ष मोरचा के लोगों ने गुरुवार को पूरे एनके एरिया का काम ठप करा दिया. बंद की सूचना 20 दिन पहले ही प्रबंधन व प्रशासन को दे दी गयी थी. सीसीएल प्रबंधन व पुलिस प्रशासन ने तैयारी […]

खलारी : प्रबंधन की उपेक्षा से नाराज तथा विभिन्न मांगों को लेकर विस्थापित रैयतों ने झारखंड विस्थापित प्रभावित संघर्ष मोरचा के लोगों ने गुरुवार को पूरे एनके एरिया का काम ठप करा दिया. बंद की सूचना 20 दिन पहले ही प्रबंधन व प्रशासन को दे दी गयी थी. सीसीएल प्रबंधन व पुलिस प्रशासन ने तैयारी की थी, लेकिन सुबह से विस्थापित सड़क पर उतर गये.
बंद समर्थकों को देखते ही सभी परियोजना व साइडिंग का काम स्वत: बंद हो गया. सुरक्षा की कमान संभाल रहे डीएसपी पुरुषोत्तम कुमार सिंह ने 300 विस्थापित रैयतों को दोपहर में गिरफ्तार कर प्रखंड कार्यालय स्थित अस्थायी कैंप में बंद कर दिया. इसके बावजूद बाहर बचे कार्यकर्ता शाम तक आंदोलन करते रहे.
हालांकि माेरचा के नेताओं की गिरफ्तारी के बाद सीसीएल प्रबंधन ने कहीं-कहीं काम शुरू कर दिया. बंद के कारण पूरे एरिया का कोयला उत्पादन तथा ढुलाई का काम बंद रहा. एक दर्जन से अधिक गांव के ग्रामीण आंदोलन में शामिल थे. ग्रामीणों को देखते हुए सीसीएलकर्मी काम छोड़ कर बाहर आ गये.
कोयला ढुलाई में लगे डंपर जहां के तहां खड़े हो गये. करकट्टा स्थित आउटसोर्सिंग का काम कर रही वीपीआर कंपनी का काम बंद करवाने पहुंची महिलाओं की पुलिस के साथ बकझक हुई. उन्हें पुलिस हिरासत में लेकर अस्थायी कैंप ले गयी. आंदोलन का नेतृत्व करनेवालों में विश्वनाथ गंझू, बहुरा मुंडा, बिगन सिंह भोगता, रंथू उरांव, महेंद्र उरांव, बालेश्वर उरांव, किशुन मुंडा, सुरेश उरांव, कमलेश तुरी, प्रभाकर गंझू, पंकज मुंडा, रमेश्वर भोगता, प्रदीप उरांव, उमेश लोहार, सुरेश गंझू, विनय उरांव, रामदयाल उरांव आदि शामिल थे.
चाक-चौबंद थी सुरक्षा व्यवस्था: विस्थापित संघर्ष मोरचा के बंद को लेकर एनके एरिया में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद थी. डीएसपी पुरुषोत्तम कुमार सिंह तथा इंस्पेक्टर सुबोध कुमार श्रीवास्तव सुबह से ही सुरक्षा के इंतजाम में लगे हुए थे. एनके एरिया की सभी परियोजनाओं आउटसोर्सिंग खदानों की सुरक्षा के लिए पुलिस बलों की तैनाती कर दी गयी थी. रांची से विशेष पुलिस बल मंगाये गये थे. महिला पुलिस भी थीं. केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के जवान पुलिस को सहयोग कर रहे थे.
यह बंद ट्रेलर है: मोरचा: झारखंड विस्थापित प्रभावित संघर्ष मोरचा की ओर से बयान जारी कर कहा गया है कि एनके एरिया का यह बंद ट्रेलर मात्र है. प्रबंधन मोरचा की मांगों पर पहल नहीं किया तो आगे अनिश्चितकाल के लिए खदानें बंद करा दी जायेंगी.बंद से करोड़ों का नुकसान : विस्थापित रैयतों के बंद को लेकर सीसीएल सहित रेलवे को करोड़ों का नुकसान हुआ है.
खदानें बंद हो जाने के कारण जहां कोयला उत्पादन नहीं हो सका वहीं, साइडिंग में काम बंद कर दिए जाने से एक भी रेल रैक कोयला बाहर नहीं जा सका. रेलवे को भाड़ा का नुकसान हुआ है.

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