गुमला: गुमला पुलिस की गिरफ्त में आये जेजेएमपी के सबजोनल कमांडर रामदेव लोहरा उर्फ काका उर्फ साधु उर्फ राहुल जी ने पुलिस के समक्ष दिए स्वीकारोक्ति बयान में संगठन से जुड़ने और अपने आपराधिक जीवन से संबंधित कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं. पुलिस के अनुसार, रामदेव लोहरा ने तीसरी कक्षा तक पढ़ाई की है, लेकिन बाद में उसने पढ़ाई छोड़ दी. उसके खिलाफ गुमला के अलावा लातेहार, छत्तीसगढ़, चतरा और लोहरदगा समेत अन्य क्षेत्रों में आपराधिक गतिविधियों से जुड़े मामले सामने आये हैं.
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में रामदेव ने कई पुलिसकर्मियों की हत्या और पुलिस पर हमले से जुड़ी घटनाओं में अपनी भूमिका की जानकारी दी है. उसने यह भी बताया कि कई बार पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में वह बच निकला था। पुलिस अब उसके बयान में सामने आये मामलों की अलग-अलग स्तर पर जांच और पुराने अभिलेखों का सत्यापन कर रही है.
तीसरी कक्षा के बाद छोड़ दी पढ़ाई
रामदेव लोहरा ने पुलिस को बताया कि उसकी उम्र करीब 40 वर्ष है और वह लातेहार जिले के बिन्गडा गांव का रहने वाला है. उसने तीसरी कक्षा तक पढ़ाई की, लेकिन पढ़ाई में मन नहीं लगने के कारण स्कूल छोड़ दिया. करीब 16 वर्ष की उम्र में उसकी शादी गुमला जिले के डुमरी थाना क्षेत्र के जैरागी गांव निवासी कलावती देवी से हुई. शादी के बाद वह ससुराल में रहने लगा.
2002 में माओवादियों के संपर्क में आया
पूछताछ में रामदेव ने बताया कि वर्ष 2002 में वह माओवादियों के संपर्क में आया और संगठन में शामिल हो गया. उसके अनुसार, छत्तीसगढ़ के कुसमी, शंकरगढ़, बलरामपुर और रामानुजपुर थाना क्षेत्रों में उसके खिलाफ कई मामले दर्ज हुए थे. इन मामलों में उसने न्यायालय में आत्मसमर्पण कर जमानत हासिल की थी.
रामदेव के मुताबिक, वर्ष 2014 में जेल से बाहर आने के बाद वह दोबारा अपने ससुराल में रहने लगा. इसी दौरान पप्पू लोहरा नामक व्यक्ति की ओर से उस पर दबाव बनाया जाने लगा. उसने पुलिस को बताया कि परिवार के लोगों को जान से मारने की धमकी भी दी गयी थी. इसके बाद वह पप्पू लोहरा के साथ रहने लगा और जेजेएमपी संगठन से जुड़ गया.
2009 में पुलिस वाहन को बम से उड़ाने की घटना का किया जिक्र
रामदेव लोहरा ने अपने स्वीकारोक्ति बयान में वर्ष 2009 की एक बड़ी घटना का भी उल्लेख किया है. उसके अनुसार, मनिका थाना क्षेत्र में एनएच-75 स्थित दोमुहान पुलिया के पास माओवादी दस्ते के साथ मिलकर पुलिस वाहन को बम से निशाना बनाया गया था. उसने इस हमले में तीन से चार पुलिसकर्मियों की मौत होने की बात कही है.
उसके अनुसार, विस्फोट के बाद दस्ते के सदस्यों ने पुलिसकर्मियों की राइफलें भी लूट ली थीं. रामदेव ने बताया कि इस घटना के बाद भी वह पुलिस की गिरफ्त में नहीं आया था.
पुराने मामलों की जांच में जुटी पुलिस
पुलिस अब रामदेव लोहरा के स्वीकारोक्ति बयान में सामने आये मामलों और घटनाओं की जांच कर रही है. पुराने मामलों से संबंधित अभिलेखों और अन्य साक्ष्यों का सत्यापन किया जा रहा है. पुलिस का मानना है कि पूछताछ से जेजेएमपी की गतिविधियों और संगठन से जुड़े अन्य सदस्यों के संबंध में भी महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है.
