रांची से सतीश कुमार की रिपोर्ट
Jharkhand Civic Polls: झारखंड में नगर निकाय चुनाव की बिसात बिछ चुकी है. तकनीकी और आधिकारिक रूप से भले ही यह चुनाव दलीय आधार पर न हो, लेकिन जमीन पर नजारा किसी विधानसभा चुनाव से कम नहीं है. राज्य के प्रमुख राजनीतिक दल भाजपा, कांग्रेस और झामुमो सीधे तौर पर अपने समर्थित उम्मीदवारों के लिए ढाल बनकर खड़े हैं. गली-कूचों में लगे पोस्टर-बैनर से लेकर सोशल मीडिया के हाईटेक कैंपेन तक सब कुछ बड़े चुनाव की तर्ज पर चल रहा है. आलम यह है कि बैलेट पेपर पर भले ही पार्टियों के चुनाव चिह्न न हों, लेकिन प्रत्याशियों के चेहरों के पीछे पार्टी की पूरी मशीनरी काम कर रही है.
भाजपा: मंडल से दिल्ली तक की मॉनिटरिंग
भाजपा ने निकाय चुनाव को गंभीरता से लिया है. प्रत्याशी चयन के लिए प्रमंडलवार प्रभारी नियुक्त किए गए हैं. केंद्रीय नेतृत्व भी सक्रिय है. राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रेखा वर्मा और राष्ट्रीय मंत्री ऋतु राज सिन्हा चुनावी प्रबंधन की रिपोर्ट ले रहे हैं. प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, अर्जुन मुंडा और मधु कोड़ा जैसे दिग्गज प्रचार में जुटे हैं. पार्टी ने बगावत करने वाले डेढ़ दर्जन नेताओं को शोकॉज नोटिस जारी किया है, जिससे स्पष्ट है कि भाजपा इसे हल्के में नहीं ले रही.
कांग्रेस: मंत्रियों और प्रभारियों की फौज मैदान में
कांग्रेस ने जिला पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी के मंथन के बाद अपने उम्मीदवारों को समर्थन दिया है. प्रदेश प्रभारी के राजू के मार्गदर्शन में पार्टी के चारों मंत्रियों को विशेष जवाबदेही सौंपी गई है. प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश मोर्चा संभाल रहे हैं. पार्टी ने साफ कर दिया है कि बागियों के लिए कोई जगह नहीं है और कई पर निलंबन की गाज भी गिरी है.
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झामुमो: बूथ मैनेजमेंट और सामाजिक समीकरण पर जोर
सत्ताधारी दल झामुमो की कमान खुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संभाल रखी है. पार्टी वार्ड स्तर पर प्रभारी नियुक्त कर माइक्रो मैनेजमेंट कर रही है. धनबाद में भाजपा से आए पूर्व मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल को समर्थन देकर पार्टी ने बड़ा सियासी दांव खेला है. जातीय और सामाजिक समीकरणों को साधते हुए मंत्रियों और विधायकों को जिलों की जिम्मेदारी दी गई है.
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