पेंशन भोगियों ने पीएम के नाम चिरेका जीएम को सौंपा मांगपत्र

मिहिजाम. पेंशन भोगियों ने आठवां केंद्रीय वेतन आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस की नीति की निंदा की है.

प्रतिनिधि, मिहिजाम. पेंशन भोगियों ने आठवां केंद्रीय वेतन आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस की नीति की निंदा की है. चित्तरंजन रेलइंजन कारखाना के सेवानिवृत कर्मचारियों और पेंशनरों ने इसे अपने भविष्य पर सीधा प्रहार मानते हुए चिरेका महाप्रबंधक अनिल कुमार गुप्ता के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक पत्र सौंपा है. इसमें टर्म्स ऑफ रेफरेंस में शामिल नॉन कंट्रीब्यूटरी पेंशन योजना की अनफंडेड लागत शब्दावली को तत्काल हटाने की मांग की गयी है. इस संबंध में कहा, पेंशन कोई दया या सरकारी कृपा नहीं, बल्कि वर्षों की ईमानदारी और निष्ठावान सेवा के बदले दिया जाने वाला स्थगित वेतन है. इसे अनफंडेड लागत कहना अपमानजनक है, बल्कि संविधान और सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक डीएस नकारा बनाम भारत संघ 1983 के फैसले की भावना के भी विरुद्ध है. उस फैसले में स्पष्ट कहा गया था कि पेंशन कर्मचारी का अधिकार है न की सरकार की कृपा. कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई और इलाज का बढ़ता खर्च वृद्धावस्था की कठिनाइयों के बीच पेंशन ही बुजुर्ग कर्मचारी और पारिवारिक पेंशनरों का एकमात्र सहारा है. ऐसे में उन्हें आठवें वेतन आयोग की सिफारिश से बाहर रखना गंभीर अन्याय होगा. मजदूर यूनियन के सचिव राजीव गुप्ता ने कहा कि जिन्होंने अपना पूरा जीवन सरकार की सेवा में समर्पित कर दिया उनके सम्मान और अधिकारों से कोई समझौता नहीं किया जायेगा.

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Published by: Jiyaram murmu

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