जामताड़ा से उमेश कुमार की रिपोर्ट
Jharkhand Health System, जामताड़ा : जामताड़ा जिले में समय पर सरकारी एंबुलेंस न मिलने के कारण एक मरीज को ट्रैक्टर पर खटिया लादकर अस्पताल ले जाने और रास्ते में ही उसकी मौत हो जाने का मामला अब बेहद गरमा गया है. शनिवार को सूबे के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी खुद स्थिति को संभालने और अपनी बात रखने जामताड़ा पहुंचे थे. मीडिया के सामने बातचीत के दौरान जब स्वास्थ्य मंत्री इस पूरे मामले को महज एक सामान्य ‘दुर्घटना’ करार देने की कोशिश कर रहे थे, ठीक उसी वक्त मौके पर मौजूद मृतक के बेटे बिमल टुडू ने सामने आकर कैमरे और आम जनता के सामने जिले की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था का सच उजागर कर दिया.
108 सेवा पर लगातार करते रहे फोन
स्वास्थ्य मंत्री के ठीक सामने खड़े होकर मृतक के पुत्र बिमल टुडू ने रोते हुए बताया कि उनके पिता की तबीयत बिगड़ने के बाद वे लगातार सरकारी 108 एंबुलेंस सेवा के नंबर पर कॉल करते रहे. परिजनों ने कई बार गुहार लगाई, लेकिन कंट्रोल रूम या स्थानीय स्तर से उन्हें कोई मदद नहीं मिली. जब मरीज की हालत बेहद नाजुक होने लगी, तो कोई अन्य साधन न देख लाचार परिजनों को मजबूरी में ट्रैक्टर मंगाना पड़ा. ट्रैक्टर की ट्रॉली पर ही खटिया लादकर मरीज को किसी तरह सदर अस्पताल लाया जा रहा था. परिजनों का सीधा आरोप है कि समय पर इलाज और वाहन न मिलने के कारण मरीज ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में दम तोड़ दिया था.
Also Read: दिऊड़ी मंदिर पहुंचे सीएम हेमंत सोरेन, राज्य के समृद्धि के लिए की प्रार्थना
मंत्री के सामने उत्पन्न हुई असहज स्थिति
भरी महफिल और मीडिया के कैमरों के सामने मृतक के बेटे द्वारा लगाए गए इन सीधे आरोपों के बाद वहां मौजूद स्वास्थ्य मंत्री और विभागीय अधिकारियों के लिए कुछ देर के लिए बेहद असहज स्थिति उत्पन्न हो गई. पीड़ित परिवार और मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों ने झारखंड की आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं और स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. परिजनों का साफ तौर पर कहना था कि यह कोई सामान्य दुर्घटना नहीं बल्कि प्रशासनिक लापरवाही है, अगर स्वास्थ्य विभाग ने मुस्तैदी दिखाई होती और समय पर एंबुलेंस उपलब्ध करा दी होती, तो शायद आज मरीज की जान बचाई जा सकती थी.
Also Read: धनबाद पहुंची केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी, कहा पीएम मोदी के 12 साल बेमिसाल
क्या है पूरा मामला
शुक्रवार 12 जून की रात को गांव के रहने वाले मोनू टुडू की अचानक तबीयत बहुत ज्यादा बिगड़ गई. मरीज की हालत गंभीर होती देख परेशान परिजनों ने तुरंत सरकारी 108 एंबुलेंस सेवा के कंट्रोल रूम से संपर्क साधा. परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने समय रहते कई बार कॉल किया और मरीज की नाजुक स्थिति का हवाला देते हुए मदद की गुहार लगाई, लेकिन इसके बावजूद एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंची. जब काफी समय बीत जाने के बाद भी कोई सरकारी सहायता या एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंची, तो मरीज की जान बचाने के लिए परिजनों और ग्रामीणों ने खुद ही कदम उठाने का फैसला किया. गांव में कोई अन्य उपयुक्त वाहन न होने के कारण मजबूरी में एक ट्रैक्टर-ट्रॉली की व्यवस्था की गई. उस ट्रैक्टर-ट्रॉली पर एक लकड़ी की खटिया (चारपाई) रखी गई, जिस पर गंभीर रूप से बीमार मोनू टुडू को लिटाया गया और किसी तरह ऊबड़-खाबड़ रास्तों से होते हुए जामताड़ा सदर अस्पताल लाया गया. हालांकि, तब तक काफी कीमती समय बर्बाद हो चुका था और अस्पताल में डॉक्टरों द्वारा इलाज शुरू किए जाने के कुछ ही समय बाद उपचार के दौरान मोनू टुडू की मौत हो गई.
