25 साल बाद भी फतेहपुर पीएचसी को सीएचसी का नहीं मिला दर्जा

फतेहपुर. फतेहपुर प्रखंड को 25 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन आज भी यहां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का गठन नहीं हो पाया है.

जनता अब भी कुंडहित और नाला पर निर्भर प्रतिनिधि, फतेहपुर. झारखंड राज्य गठन के बाद अस्तित्व में आए फतेहपुर प्रखंड को 25 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन आज भी यहां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का गठन नहीं हो पाया है. प्रखंड का दर्जा मिलने के बावजूद स्वतंत्र स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था का अभाव लोगों को लगातार परेशान कर रहा है. केवल फतेहपुर सीएचसी ही नहीं, बल्कि करमाटांड़ का भी मौजूदा हाल यही बना हुआ है. वर्तमान व्यवस्था के अनुसार फतेहपुर का संपूर्ण स्वास्थ्य संचालन अब भी कुंडहित सीएचसी के सहारे चल रहा है. प्रसव, आपातकालीन स्थिति, टीकाकरण, रेफरल और गंभीर मरीजों के इलाज के लिए ग्रामीणों को कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है. क्षेत्रवासियों का कहना है कि 24 साल से प्रखंड तो है, पर सीएचसी नहीं. मरीज समय पर इलाज से वंचित रह जाते हैं. खराब सड़कों और कमजोर परिवहन व्यवस्था के कारण फतेहपुर से कुंडहित पहुंचना बेहद मुश्किल होता है. इस वजह से कई लोग सीधे जामताड़ा का रुख करते हैं. गर्भवती महिलाओं, दुर्घटना पीड़ितों और आपातकालीन मरीजों के लिए यह देरी अक्सर गंभीर रूप ले लेता है. विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो के पहल पर फतेहपुर में सीएचसी स्तर का आधुनिक भवन तैयार हो चुका है. लेकिन संचालन अब भी पीएचसी का ही हो रहा है. सीएचसी की मंजूरी और स्टाफिंग अब तक लंबित है. ग्रामीणों का आरोप है कि करोड़ों की लागत से बना भवन बिना उचित उपयोग के पड़ा है और क्षेत्र अब भी सीमित स्वास्थ्य सेवाओं पर निर्भर है. – सीएचसी बनने से क्या बदलेगा, क्या मिलेगा लाभ सीएचसी का दर्जा मिलने से नियमित डॉक्टरों की पोस्टिंग, सीएचसी में विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति, जनरल फिजिशियन, स्त्री रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ, सर्जन पीएचसी की तुलना में यहां स्थायी मेडिकल टीम चौबीसों घंटे उपलब्ध रहेंगी. इसके अलावा आपातकालीन सेवा, इमरजेंसी कक्ष, ऑक्सीजन सपोर्ट, जीवनरक्षक दवाएं, प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ, रात में प्रसव, हादसा या अचानक तबीयत बिगड़ने पर तुरंत इलाज मिल सकेगा. बेहतर लैब और जांच सुविधाएं, ब्लड टेस्ट, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, जांच के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा. यही नहीं समग्र स्वास्थ्य सुधार, टीकाकरण में तेजी, मातृ व शिशु मृत्यु दर में कमी, सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, संक्रामक रोगों पर बेहतर नियंत्रण मिल पायेगा. फतेहपुर के 21 पंचायतों के ग्रामीणों का सरकार व विभाग से सवाल यह है कि 24 साल बाद भी फतेहपुर को उसका हक क्यों नहीं मिल रहा है. स्थानीय लोगों की नाराज़गी का मुख्य कारण सीएचसी भवन बनकर तैयार होने के बावजूद, इसका संचालन पीएचसी स्तर का आखिर क्यों? आखिर फतेहपुर को उसका हक कब मिलेगा? आम लोगों की मांग है किब सरकार और स्वास्थ्य विभाग जल्द निर्णय लेकर फतेहपुर को उसका अपना सीएचसी प्रदान करे. ताकि ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अन्य जगहों पर न भटकना पड़े. क्या कहते हैं सिविल सर्जन – सरकार के स्वास्थ्य सचिव को प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन पहल नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है. फतेहपुर को प्रखंड का दर्जा मिला तो सीएचसी का मिलना चाहिए. इससे मेन पावर बढ़ती और लोगों को इसका लाभ भी उसी अनुरूप मिल पाता. – डॉ आनंद मोहन सोरेन, सीएस, जामताड़ा

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Published by: Jiyaram murmu

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