टाटा स्टील कंपनी के एमडी टीवी नरेंद्रन ने कंपनी में बेकार पड़े सामान, पुरानी मशीनों और स्क्रैप के बेहतर प्रबंधन के उद्देश्य से 15 सदस्यीय गाइडलाइन प्राइस कमेटी के गठन को मंजूरी दी है. यह कमेटी तत्काल प्रभाव से कार्य शुरू करेगी. कमेटी के दायरे में जमशेदपुर (सीआरएम बारा), साहिबाबाद और खोपोली जैसे प्लांट्स के डाउनस्ट्रीम ऑपरेशन शामिल होंगे. इसका मुख्य उद्देश्य पुरानी व बेकार मशीनों, उपकरणों और स्क्रैप की उचित कीमत तय कर उनकी पारदर्शी बिक्री सुनिश्चित करना है. कमेटी की प्रमुख जिम्मेदारियों में बेकार पड़े सामान और पुरानी मशीनों का बाजार मूल्य निर्धारित करना, बिक्री के लिए उचित मूल्य की अनुशंसा करना यह आकलन करना शामिल है कि किसी प्लांट में अनुपयोगी हो चुकी मशीन या उपकरण का उपयोग कंपनी के किसी अन्य प्लांट में किया जा सकता है या नहीं. यदि पुन: उपयोग की संभावना होगी तो कमेटी उसके लिए भी सुझाव देगी.
कमेटी में ये हैं शामिल
देश भर के अलग-अलग विभागों और प्लांट्स से अधिकारियों को गाइडलाइन प्राइस कमेटी में शामिल किया गया है. प्रमुख सदस्यों में अमित अग्रवाल (इलेक्ट्रिकल मेंटेनेंस प्रमुख), चंद्र प्रकाश और अतुल अग्रवाल (साहिबाबाद प्लांट), अमित कुमार गुप्ता (सीआरएम बारा, जमशेदपुर), अवनीश कुमार और सुनील कुमार (टिनप्लेट), चित्तरंजन और शिवकुमार कृष्णस्वामी (वायर डिवीजन, जमशेदपुर), तारक प्रकाशचंद्र लाड (वेस्ट जोन), विकास कुमार भलोटिया (फाइनेंस विभाग), गोविंद शर्मा, मोहित राज और अभिषेक कुमार सिंह (मार्केटिंग एंड सेल्स विभाग) शामिल हैं.
कंपनी को होगा आर्थिक लाभ
इस कदम से टाटा स्टील को अपने बेकार पड़े सामानों से भी अच्छी कमाई करने का मौका मिलेगा. साथ ही, जो चीजें फेंकने या बेचने लायक समझी जा रही थीं, अगर उनका दोबारा इस्तेमाल हो जाता है, तो कंपनी का नया सामान खरीदने पर फिजूल खर्च भी बच जायेगा.
