धालभूमगढ़ : नरसिंहगढ़ निवासी शंकर कुंडू और विमल सूर पिछले छह सालों से विषधर सांपों को पकड़ कर वन विभाग के माध्यम से सुरक्षित रूप से जंगलों में छोड़ने का काम करते आ रहे हैं. घरों में निकले सांपों को पकड़ने के लिए वे कुछ मेहनताना नहीं लेते बल्कि लोगों को सांपों को मारने से रोकते हैं. उन्हें पकड़ कर जंगलों में छोड़ देते हैं. उन्होंने अब तक कई विषधर नागों को पड़कर सुरक्षित रूप से जंगल में छोड़ा है.
सांप भी प्रकृति की करते हैं प्रकृति की रक्षा : शंकर
धीरे-धीरे अब क्षेत्र के कई गांव के लोग घरों में सांप निकलने पर शंकर कुंडू को बुलाते हैं. सांप पकड़ने की शुरुआत करने के बारे में शंकर कुंडू एक दिलचस्प घटना को बताते हैं. कहा कि उनके एक मित्र का पांव सांप पर गिर जाने से सांप ने उसे काट लिया था. इसी दौरान लोगों ने सांप को पीट-पीट कर मार डाला. यह देखकर उन्हें खराब लगा तथा मन द्रवित हो उठा. उनका मानना है कि सांप भी प्रकृति की रक्षा करते हैं. तब से उन्होंने ठान लिया कि सांपों को सुरक्षित पड़कर जंगल में छोड़ने का काम करेंगे. उन्होंने सांप पकड़ने के लिए लोहे की सरिया से एक उपकरण बनाया तथा हाथों के ग्लब्स खरीदे और धीरे-धीरे सांपों को पकड़ने का सिलसिला शुरू हुआ.
अब तक सैकड़ों विषैली सांपों को जंगलों में छोड़ा
शंकर कुंडू ने बताया - अब तक उन्होंने करैत, कोबरा, अजगर, साइलेंट किलर, बैंडिट क्वीन, चंद्र बोडा आदि सैकड़ों सांपों को पड़कर जंगलों में सुरक्षित छोड़ा है. सांप पकड़ने के बाद इसकी सूचना वे वन अधिकारियों को देते हैं. साथ ही उनके निगरानी में सांपों को जंगल में छोड़ देते हैं. शंकर कुंडू एक साधारण ठेला चला कर अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं. उन्होंने सांसद और विधायक से गुहार लगायी है कि उन्हें एक स्थायी रोजगार उपलब्ध कराया जाए ताकि वे अपने परिवार का पालन पोषण करने के साथ-साथ प्रकृति की सुरक्षा के लिए सांपों की सुरक्षा करते हुए पर्यावरण संरक्षण का काम कर पाएं. वन विभाग द्वारा भी उन्हें सांप पकड़ने के लिए अधिकृत करने का आश्वासन दिया गया है. अब लोग इन्हें धालभूमगढ़ के स्नैक मैन के नाम से जानने लगे हैं. नरसिंहगढ़ के ही विमल सूर इनका सहयोग करते हैं.
