करनडीह में सड़क जाम स्थगित, दूषित पानी की निकासी को लेकर ग्रामसभा सख्त

करनडीह में दूषित पानी की समस्या पर शनिवार को ग्रामसभा की बैठक हुई. जिला प्रशासन और रेलवे के प्रयासों को देखते हुए टाटा-हाता मुख्य सड़क पर किया जाने वाला जाम स्थगित कर दिया गया है. ग्रामसभा ने 15 दिनों का 'वेट एंड वॉच' पीरियड रखा है.

जमशेदपुर : दूषित पानी विवाद मामले को लेकर गैंताडीह स्थित पंचायत भवन में शनिवार को करनडीह ग्रामसभा का आयोजन मुखिया सरस्वती टुडू की अध्यक्षता में किया गया. बैठक में दूषित पानी की निकासी को लेकर जिला प्रशासन व रेलवे विभाग द्वारा किये जा रहे ठोस प्रयास को देखते हुए टाटा-हाता मुख्य सड़क पर करनडीह सड़क जाम को अगले आदेश तक के लिए स्थगित कर दिया गया. लेकिन ग्रामसभा ने यह चेतावनी दिया है कि धरातल पर जल्द काम भी दिखना चाहिए.

15 दिनों तक वेट एंड वॉच करेगा ग्राम सभा

ग्रामसभा 10-15 दिनों तक वेट एंड वॉच करेगा. उसके बाद यदि दूषित पानी की निकासी का स्थायी समाधान की दिशा में काम आगे नहीं बढ़ा तो सड़क जाम का आह्वान किया जायेगा. मुखिया सरस्वती टुडू ने बताया - रेलवे और जिला प्रशासन की ओर से जल निकासी को लेकर पहल शुरू की गई है. शनिवार को ग्रामसभा की बैठक से पूर्व एक प्रतिनिधिमंडल टाटानगर रेलवे के एईएन से मिला. एईएन ने रेलवे फाटक से एसपी कॉलेज तक स्थल का सर्वे कर रिपोर्ट डीआरएम को भेज दी है. रेलवे की स्वीकृति मिलते ही जल निकासी की व्यवस्था का स्टीमेट तैयार किया जायेगा.

रेलवे फाटक के समीप यथावत रहेगा नालियों का जाम

ग्रामसभा के सदस्यों ने कहा कि परसुडीह शीतला चौक से करनडीह तक बने फ्लैटों से निकलने वाला दूषित पानी खेतों में बह रहा है. इससे कृषि भूमि प्रभावित हो रही है. किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. इसलिए जब तक समस्या का ठोस समाधान नहीं निकलता, तब तक करनडीह फाटक के समीप नालियों को नहीं खोला जायेगा. बैठक में शंंकर हेंब्रम, एचसी प्रधान, महेश मुर्मू, मंटू गोप, कुनाराम टुडू, रघुनाथ हांसदा, मदन हांंसदा, एके भौमिक, महेंद्र प्रसाद, लेचा माझी, बीसी टुडू, सावना मुर्मू, टीके भौमिक, मधु सोरेन, अनंत प्रसाद समेत काफी संख्या में ग्रामवासी मौजूद थे.


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लेखक के बारे में

By दशमत सोरेन

दशमत सोरेन ने रांची विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर किया है. वे 29 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उनकी विशेषज्ञता मुख्य रूप से झारखंड की आदिवासी-मूलवासी राजनीति, स्थानीय समुदायों की भाषा-संस्कृति और यहां के सामाजिक ताना-बाना है. वे वर्ष 2010 से प्रभात खबर के साथ एक ट्राइबल रिपोर्टर के रूप में काम कर रहे हैं.

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