‘पान’ SC तो ‘तांती’ OBC क्यों ? 1950 के रिकॉर्ड का हवाला देकर समाज ने उठाया सवाल, मंत्री ने कही ये बात...

झारखंड में कोल्हान प्रमंडल के पान-तांती समाज के प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री चमरा लिंडा से मुलाकात की. उन्होंने जाति कॉलम में 'पान' के पर्याय 'तांती' दर्ज होने के बावजूद SC प्रमाण पत्र जारी करने की मांग की है.

जमशेदपुर : झामुमो नेता महाबीर मुर्मू के नेतृत्व में कोल्हान प्रमंडल पान तांती समाज कल्याण समिति के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को मोरहाबादी स्थित कल्याण कॉम्प्लेक्स में विभागीय मंत्री चमरा लिंडा से मुलाकात की. प्रतिनिधिमंडल ने कोल्हान प्रमंडल में रहने वाले पान जाति, जिनके भू-अभिलेख के जाति कॉलम में ‘पान’ के पर्याय के रूप में ‘तांती’ दर्ज है, उन्हें अनुसूचित जाति (एससी) का प्रमाण पत्र निर्गत करने की मांग को लेकर साक्ष्यों के साथ ज्ञापन सौंपा.

मंत्री ने कहा - सीएम से करेंगे वार्ता

ज्ञापन प्राप्त करने के बाद मंत्री चमरा लिंडा ने डॉ. रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण शोध संस्थान (टीआरआई) के निदेशक एएस कच्छप को निर्देश दिया कि वे समाज के पुराने प्रतिवेदनों और उपलब्ध दस्तावेजों का गहन अध्ययन कर रिपोर्ट सौंपें. मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि अध्ययन रिपोर्ट के आधार पर वे मुख्यमंत्री से वार्ता करेंगे, ताकि समाज के लोगों को एससी प्रमाण पत्र मिलने का मार्ग प्रशस्त हो सके.

एक ही समुदाय के हैं पान, तांती व स्वांसी

प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि पूर्व के अध्ययन के अनुसार भी पान-तांती को अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र दिया जा सकता है. उन्होंने कहा कि झारखंड में पान, तांती और स्वांसी मूल रूप से एक ही समुदाय के हैं. वर्ष 1950 के भू-अभिलेख में जिनका नाम पान या स्वांसी दर्ज हुआ, उन्हें एससी में रखा गया, जबकि तांती दर्ज होने वालों को ओबीसी श्रेणी में डाल दिया गया. क्षेत्र के आधार पर हुआ यह वर्गीकरण अनुचित है, अत: पूरे समाज को अनुसूचित जाति की एक ही श्रेणी में रखा जाना चाहिए. इस अवसर पर समाज के महासचिव हरिश्चंद्र भंज, सुरेश पात्रो, उमाकांत दास, मनोज तांती, बनारस दास, जगदीश दास, दिनेश कुमार दंडपट, लक्ष्मण पात्रो आदि उपस्थित थे.

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By Sanjeev bhardwaj

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