Jharkhand High Court, रांची (राणा प्रताप की रिपोर्ट): झारखंड हाईकोर्ट ने जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित बेहद जर्जर और खतरनाक हो चुके ‘लक्ष्मी मेंशन’ भवन को लेकर दायर याचिका पर बेहद गंभीर रुख अपनाया है. जस्टिस संजय प्रसाद की अवकाशकालीन पीठ (Vacation Bench) ने मामले की तात्कालिकता को देखते हुए राज्य सरकार और जमशेदपुर नोटिफाइड एरिया कमेटी (JNAC) को अविलंब प्रति शपथ पत्र (Counter Affidavit) दायर करने का कड़ा निर्देश दिया है. इसके साथ ही, अदालत ने पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त (DC) और जेएनएसी के उप नगर आयुक्त को 21 मई (गुरुवार) को होने वाली अगली सुनवाई में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का आदेश जारी किया है.
भवन में रहने वाले लोग बनाए जाएंगे प्रतिवादी
सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रार्थी डुमकेश्वर महतो को निर्देश दिया कि वर्तमान में लक्ष्मी मेंशन भवन के भीतर जो भी लोग रह रहे हैं, उन्हें भी इस मामले में प्रतिवादी (Respondent) बनाया जाए, ताकि उनका भी पक्ष सुना जा सके. इसके साथ ही, अदालत ने प्रार्थी को ‘दस्ती नोटिस’ (Hand to Hand Notice) के माध्यम से सभी संबंधित पक्षों और नए जोड़े गए प्रतिवादियों को व्यक्तिगत रूप से नोटिस तामिला कराने की विशेष अनुमति भी प्रदान की है.
21 मई को होगी अगली सुनवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने बेहद कम समय देते हुए इसकी अगली सुनवाई 21 मई 2026 की तिथि मुकर्रर की है. सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता (AAG) सचिन कुमार और जेएनएसी की ओर से अधिवक्ता कृष्ण कुमार ने अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखा और जवाब दाखिल करने के लिए समय देने का आग्रह किया.
Also Read: Koderma: गुजरात में चंदवारा के युवक की संदिग्ध मौत, हत्या की आशंका
NIT जमशेदपुर की रिपोर्ट में भी ‘खतरनाक’ घोषित है भवन
इससे पूर्व, प्रार्थी की ओर से पैरवी करते हुए अदालत को बताया गया कि बिष्टुपुर का लक्ष्मी मेंशन भवन वर्तमान में बेहद जर्जर, क्षतिग्रस्त स्थिति में है, जो कभी भी अचानक जमींदोज हो सकता है और इससे जान-माल का भारी नुकसान हो सकता है.
प्रशासन ने एनआईटी जमशेदपुर से मंगवाई थी विस्तृत रिपोर्ट
प्रार्थी के वकील ने अदालत को पूर्व के घटनाक्रमों से अवगत कराते हुए बताया कि इस संबंध में पूर्व में भी हाईकोर्ट की एक समन्वय पीठ ने अप्रैल 2025 में जिला प्रशासन को भवन की खतरनाक स्थिति पर आवश्यक और दंडात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया था. हाईकोर्ट के उस आदेश के बाद प्रशासन द्वारा एक उच्च स्तरीय समिति गठित की गई थी, जिसने तकनीकी जांच के लिए एनआईटी (NIT) जमशेदपुर से विस्तृत रिपोर्ट मंगवाई थी, एनआईटी जमशेदपुर की जांच रिपोर्ट में भी इस बहुमंजिला इमारत को बेहद ‘खतरनाक और रहने के लिए अयोग्य’ (जर्जर) घोषित किया गया था. इस तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर जेएनएसी के उप नगर आयुक्त ने भवन को तुरंत खाली कराने और उसे ध्वस्त (Demolish) करने का आधिकारिक आदेश भी जारी किया था, लेकिन प्रशासनिक शिथिलता के कारण आज तक वह खतरनाक भवन जस का तस खड़ा है और उसमें लोग रह रहे हैं.
क्या है प्रार्थी की मांग?
उल्लेखनीय है कि प्रार्थी डुमकेश्वर महतो ने झारखंड हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दायर की है. याचिका में कहा गया है कि व्यस्ततम व्यावसायिक क्षेत्र बिष्टुपुर में स्थित लक्ष्मी मेंशन भवन की स्थिति इतनी जर्जर हो चुकी है कि यह किसी भी दिन ताश के पत्तों की तरह गिर सकता है. यदि समय रहते इसे खाली कराकर ध्वस्त नहीं किया गया, तो यहां किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता. इसी याचिका पर संज्ञान लेते हुए अब हाईकोर्ट ने आला अधिकारियों को तलब किया है.
Also Read: सरायकेला के मॉडल महाविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली 2020 पर सेमिनार
